Rishi Panchami Puja Vidhi: जाने-अनजाने हुए पापों व भूलों से मुक्ति हेतु आज इस विधि से करें सप्तऋषियों की पूजा
punjabkesari.in Tuesday, Sep 15, 2026 - 08:49 AM (IST)
Rishi Panchami Vrat Guidance: सनातन धर्म में भाद्रपद माह के दौरान आने वाले व्रतों में ऋषि पंचमी के व्रत का अत्यंत विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत रखने से व्यक्ति को जाने-अनजाने में हुए सभी पापों व भूलों से मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन और हरतालिका तीज के दूसरे दिन रखा जाता है। इस व्रत की सबसे खास बात यह है कि यह किसी देवी-देवता को समर्पित न होकर सप्त ऋषियों को समर्पित होता है।
Rishi Panchami Vrat importance ऋषि पंचमी का धार्मिक महत्व
ऋषि पंचमी का व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा रखा जाता है। कई क्षेत्रों और परंपराओं में इसे 'भाई पंचमी' के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन विधि-विधान से सप्त ऋषियों का पूजन करने से जीवन में सुख-शांति और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
Rishi Panchami mantra ऋषि पंचमी का सिद्ध मंत्र
सप्त ऋषियों का आशीर्वाद प्राप्त करने और अर्घ्य अर्पित करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना गया है:
मंत्र: कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोय गौतम:।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषय: स्मृता:।।
गृह्नन्त्वर्ध्यं मया दत्तं तुष्टा भवत मे सदा।।
Rishi panchami puja vidhi ऋषि पंचमी पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन सुबह उठकर स्नान करने के बाद सप्त ऋषियों के साथ देवी अरुधंती की स्थापना करें।
अगर हो सके तो इस दिन हल्के पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
पूजा करने से पहले पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव कर लें।
गंगाजल छिड़कने के बाद अगरबत्ती या धूप बत्ती करें।
उसके बाद सप्त ऋषियों की तस्वीर के समक्ष जल से भरा हुआ कलश रख दें।
सप्त ऋषियों की पूजा करने के बाद उन्हें पीले रंग के फल- फूल और मिठाई अर्पित करें।
सारी विधि करने के बाद अंत में सप्त ऋषियों से अपनी सभी भूलों के लिए माफी मांग लें।
ऋषि पंचमी की कथा सुनना न भूलें। अंत में आरती खत्म होने के बाद प्रसाद बांट दें।
पूजा हो जाने के बाद, घर के बड़ों के चरण स्पर्श करें।
