Harchath Vrat puja vidhi: संतान की दीर्घायु के लिए इस विधि से करें हरछठ पूजा, नोट करें संपूर्ण सामग्री List
punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 02:01 PM (IST)
Harchath Vrat 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बलराम जयंती को हल छठ या हलषष्ठी के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार हल से मतलब है बलराम और छठ का मतलब षष्ठी तिथि से है। प्रत्येक वर्ष बलराम जंयती का पर्व श्री कृष्ण जन्माष्टमी से ठीक दो दिन पहले मनाया जाता है। चूंकि द्वापर युग में जब श्री कृष्ण ने जन्म लिया तो शेषनाग जी न इस बार उनके बड़े भाई के रूप में जन्म लिया था इसलिए पहले उनका जन्म हुआ था।
यह व्रत विशेष रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखती हैं। इसके साथ ही जिन दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त करने में बाधाएं आ रही हैं, उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है।

Balarama Jayanti Vrat Katha बलराम जयंती व्रत कथा: किंवदंती के अनुसार प्राचीन काल में द्वापर युग के समय, गोकुल और वृंदावन के आसपास का क्षेत्र हरियाली और जल से भरपूर था। लेकिन एक वर्ष ऐसा आया जब धरती सूख गई, खेत बंजर हो गए और लोगों के चेहरों पर निराशा छा गई। गांव के बुजुर्ग चिंतित होकर नंद भवन पहुंचे और बोले, “गोपेश्वर! इस बार न तो खेतों में अन्न है, न तालाब में पानी। लगता है धरती माता हमसे रुष्ट हैं।”
नंद बाबा ने यह बात रोहिणी माता और बालराम को बताई। तब बालराम जो उस समय युवा और बलवान हो चुके थे, गंभीर स्वर में बोले, “धरती मां को केवल पूजा से नहीं, श्रम और न्याय से प्रसन्न किया जा सकता है।”
अगले ही दिन उन्होंने गांव के सभी स्त्री-पुरुष, बालक-बालिकाओं को एकत्र किया। हाथ में हल और मूसल लेकर स्वयं खेत में उतर पड़े। वे मिट्टी को जोतते, जल के लिए नहर बनाते और थके हुए लोगों को उत्साह देते। तीन दिन और तीन रात की मेहनत के बाद खेतों में नमी लौट आई और बादलों ने घेरकर वर्षा बरसा दी।
उसी समय धरती माता प्रकट होकर बोली, “वत्स बलराम! तुम केवल बल के ही नहीं, परिश्रम और धर्म के भी प्रतीक हो। तुम्हारे स्पर्श से मैं सदा उर्वर और समृद्ध रहूंगी।”
धरती माता ने आशीर्वाद दिया कि जो भी मनुष्य बलराम जयंती के दिन बलराम का व्रत करेगा, हल और अन्न का पूजन करेगा और भूमि-संरक्षण का संकल्प लेगा। उसके जीवन में अन्न, जल और बल की कभी कमी नहीं होगी।

हरछठ व्रत की संपूर्ण पूजा सामग्री लिस्ट
भैंस का दूध, शुद्ध घी, दही और गोबर
महुए का फल, फूल और पत्ते
तालाब में उगा हुआ पसही चावल
सात प्रकार के अनाज: गेहूं, जौ, अरहर, मक्का, मूंग, धान आदि
मिट्टी के छोटे कुल्हड़ और एक मटकी
ज्वार की धानी और धान का लावा
भुना हुआ चना और घी में भुना हुआ महुआ
पूजा के अन्य अनिवार्य तत्व: ऐपन, देवली-छेवली, लाल चंदन, हल्दी, कुश और मिट्टी का दीपक
श्रृंगार व वस्त्र: नया वस्त्र, जनेऊ
Harchath Vrat puja vidhi हरछठ पूजा विधि- शाम के समय पूजा के लिए व्रती मालिन हरछठ बनाकर लाती हैं। इसके बाद झरबेरी, कुश और पलास की एक-एक डालियां एक साथ बांधी जाती है। उसके बाद हरछठ को वहीं पर लगा दिया जाता है। सबसे पहले कच्चे जनेऊ का सूत हरछठ को पहनाया जाता है। उसके बाद फल आदि का प्रसाद चढ़ाने के बाद कथा सुनी जाती है।
हरछठ पर क्या न खाएं- इस दिन खेत में उगे हुए या हल जोत कर उगाए गए अनाज और सब्जियों का सेवन न करें क्योंकि हल बलराम जी का प्रमुख शस्त्र है। इसके अलावा गाय का दूध और उससे बनी हुई वस्तुओं का सेवन भी नहीं करना चाहिए।
हरछठ पर क्या खाएं- तालाब में उगे पसही/तिन्नी का चावल या महुए का लाटा। भैंस के दूध से बने दही और महुवा (सूखे फूल), पलाश के पत्ते व पसही के चावल।

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