किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए ऋषि पंचमी व्रत, जानें शास्त्रों में बताए खास नियम
punjabkesari.in Monday, Sep 07, 2026 - 02:15 PM (IST)
Rishi Panchami Vrat Rules : भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का पावन पर्व मनाया जाता है। सनातान धर्म में ऋषि पंचमी का बहुत विशेष महत्व है। इस साल ऋषि पंचमी का व्रत 15 सितंबर 2026 को है। गणेश चतुर्थी के ठीक अगले दिन यह व्रत सप्तऋषियों की कृपा प्राप्त करने और अनजाने में हुए पापों की प्रायश्चित करने के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में महिलाओं को लेकर इस व्रत के बारे में कुछ विशेष नियम बताए गए है। तो आइए जानते हैं कि किन महलिओं को यह व्रत नहीं रखना चाहिए और पूजा के क्या नियम हैं।
किन महिलाओं को नहीं रखना चाहिए ऋषि पंचमी व्रत?
शारीरिक रूप से अस्वस्थ या बीमार महिलाएं
शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई महिला किसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है या शारीरिक रूप से बहुत कमजोर है, तो उसे निर्जला या कठिन व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में केवल मानसिक पूजा और कथा करना ही सही माना जाता है।
गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताएं
शास्त्रों के अनुसा, जो महिलाएं अपने बच्चे को स्तनपान करवाती हैं एवं गर्भवती हैं। उन्हें अपने और बच्चे की सेहत का ध्यान रखते हुए व्रत नहीं रखना चाहिए। वे व्रत के कठोर नियमों का पालन करने की जगह फलाहार लो सकती हैं या सात्विक रहकर पूजा कर सकती हैं।
पीरियड्स के दौरान
ऋषि पंचमी के दिन कोई महिला मासिक धर्म से हो, तो उन्हें विधि-विधान से स्पर्श पूजन करने या मंदिर में जाकर सीधे मूर्तियों को छूने से बचना चाहिए। हालांकि, वे दूर बैठकर कथा सुन सकती हैं और मन ही मन ऋषियों का ध्यान कर सकती हैं।
ऋषि पंचमी व्रत के मुख्य नियम
इस दिन सुबह उठकर अपामार्ग की जड़ या दातून से दांत साफ करने और स्नान के जल में विशेष जड़ी-बूटियां या गंगाजल मिलाकर स्नान करने की परंपरा है।
ऋषि पंचमी व्रत के पारण या फलाहार में हल से जोते गए खेत का अनाज नहीं खाया जाता। इस दिन केवल पसही के चावल या श्यामा चावल और सकरकंद, अरबी आदि का ही सेवन किया जाता है।
इस दिन कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ- इन सप्तऋषियों की स्थापना कर फल, फूल, धूप और दीप से विधिवत पूजा की जाती है।
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