आखिर क्यों रावण ने ऐसा कहा कि शत्रु हो तो राम जैसा
punjabkesari.in Saturday, Feb 16, 2019 - 04:40 PM (IST)
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हिंदू धर्म में वैसे तो बहुत से ग्रंथ प्रचलित हैं लेकिन रामायण एक ऐसा ग्रंथ है जिसे पढ़ने या सुनने से मन को एक अलग शांति का अनुभव होता है। रामायण में ऐसे बहुत से प्रसंग हैं जिनसे हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। आज हम आपको उसी में से राम और रावण से जुड़ा एक ऐसे ही प्रसंग के बारे में बताएंगे जोकि काफी दिलचस्प रहा है। जिसमें रावण ने राम के लिए कहा है कि "अगर दुश्मन हो तो राम जैसा"। तो चलिए विस्तार पूर्वक जानते हैं इसके बारे में।

रामायण के एक प्रसंग के अनुसार श्री राम ने जामवंत को रावण के पास एक खास निमंत्रण लेकर भेजा। जामवंत जब रावण के दरबार में गए तो उनका भव्य स्वागत किया गया। कहते हैं कि रावण ने जामवंत के स्वागत में उन्हें अपने सिंहासन पर बैठा दिया। ऐसा कहा जाता है कि जामवंत ने रावण से कहा कि मैं राम के कहने पर आपको आचार्य पद धारण करने का निमंत्रण लेकर आया हूं। जामवंत के मुख से यह सुनकर रावण बहुत हैरान हुआ। रावण के अलावा उस सभा में उपस्थित अन्य लोगों को भी काफी हैरानी हुई। रावण ने जामवंत से कहा कि यदि मैंने राम का यह निमंत्रण ठुकरा दिया तो क्या होगा? इस पर जामवंत ने कहा कि यह तो आपकी मर्जी है।

अंत में बहुत सोचने के बाद रावण ने राम का आचार्य बनने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। रावण के इस फैसले से सभा में मौजूद सभी लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ। इस पर रावण ने कहा कि अभी तक सबने मुझे एक राक्षस के रूप में ही जाना लेकिन अब मुझे आचार्य के रूप में भी याद किया जाएगा। उसी समय रावण के मुख से निकला कि शत्रु हो तो राम जैसा। कहते हैं कि जामवंत जब रावण के निमंत्रण स्वीकार करने की खबर लेकर राम के पास पहुंचे तो भगवान राम भी बहुत प्रसन्न हुए।

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