वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: क्या आपकी रसोई में भी बना है मंदिर? जानिए वास्तु के अनुसार इसके अनजाने परिणाम

punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 04:54 PM (IST)

Shrine in the kitchen: भारतीय संस्कृति में रसोईघर और पूजा स्थल, दोनों का विशेष महत्त्व है। रसोईघर भोजन बनाने और परिवार के पोषण से जुड़ा महत्त्वपूर्ण स्थान है, जबकि पूजा स्थल हमारी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक जीवन का केंद्र होता है। आजकल फ्लैट और छोटे मकानों में जगह की कमी के कारण कई लोग रसोईघर के अंदर या उसके पास ही छोटा-सा मंदिर बना लेते हैं। ऐसे में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या किचन में पूजा का स्थान बनाना उचित है या पूजा के लिए अलग स्थान होना चाहिए?

PunjabKesari Place of worship in the kitchen

वास्तु के संदर्भ में इस विषय को समझना आवश्यक है, ताकि परंपराओं और मान्यताओं के नाम पर किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
वास्तु के पारंपरिक सिद्धांतों के अनुसार, रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण को उपयुक्त माना जाता है, जबकि पूजा स्थल के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण को प्राथमिकता दी जाती है। इस प्रकार, दोनों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित करने पर जोर दिया जाता है।

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वास्तु के व्यावहारिक अनुभवों के अनुसार, रसोईघर के अंदर पूजा स्थल बनाने वाले घरों में परिवार के सदस्यों के स्वभाव में उग्रता और आपसी विवाद जैसी स्थितियां देखने को मिल सकती हैं। इसके साथ ही, परिवार के किसी सदस्य को रक्त संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं होने की बात भी अनुभव में आई है। इसलिए वास्तु शास्त्र के दृष्टिकोण से रसोईघर के अंदर पूजा का स्थान बनाना उचित नहीं माना जाता।
यदि घर में हॉल, लिविंग रूम या किसी अन्य कमरे में स्वच्छ और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध है, तो वहां पूजा स्थल बनाया जा सकता है। इससे पूजा-पाठ और भोजन बनाने की गतिविधियों के लिए अलग-अलग स्थान बनाए रखना आसान होता है। अतः घर में जगह की कमी होने पर भी रसोई घर के अंदर मंदिर बनाने के बजाय किसी अन्य उपयुक्त स्थान का चयन करना बेहतर है।

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वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com

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Content Writer

Niyati Bhandari

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