Nirjala Ekadashi Daan Items and Benefits: पद्म पुराण के अनुसार, अक्षय पुण्य के लिए निर्जला एकादशी पर करें इन वस्तुओं का दान
punjabkesari.in Wednesday, Jun 24, 2026 - 02:07 PM (IST)
Nirjala Ekadashi Daan Items and Benefits: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का महत्व सर्वोपरि है लेकिन साल भर की 24 एकादशियों में 'निर्जला एकादशी' को सबसे कठिन और फलदायी माना गया है। ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में बिना जल ग्रहण किए किए जाने वाले इस व्रत को रखने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त होता है। इस वर्ष यह महापर्व 25 जून, 2026 को मनाया जाएगा। शास्त्रों और विशेषकर पद्म पुराण में इस दिन दान करने की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है, जो न केवल कष्टों को हरता है बल्कि स्वर्ग के द्वार भी खोलता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Daan: राशि अनुसार करें दान
मेष : सात अनाज दान करें।
वृष : सफेद वस्त्र।
मिथुन : हरे फल, आम, खरबूजा।
कर्क : जल की व्यवस्था, वाटर कूलर, पंखे, कूलर का दान।
सिंह : एयर कंडीशनर या धर्म स्थानों पर विद्युत उपकरण, जीवन में सुख-समृद्घि एवं वृद्धि लाएंगे।
कन्या: अनाथालय या लंगर में हरी सब्जियां व खरबूजे दान करें।
तुला : मीठे जल या पेय की छबील लगाएं।
वृश्चिक : भगवान विष्णु का स्मरण और तरबूज।
धनु : पीला ठंडा केसर युक्त दूध।
मकर : छतरी, जल पात्र, कलश, छायादार पौधारोपण या शैल्टर का निर्माण कर सकते हैं।
कुंभ : जल से भरा कुंभ, कूलर, फ्रिज, वाटर कूलर, एंबुलैंस वाहन।
मीन : ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम:’ का पाठ और ‘सर्व भूत हिते रता:’ की भावना से सार्वजनिक स्थान पर पीपल का पेड़ लगाना आपको निरोगी काया देगा और अन्य को छाया देगा।

अक्षय पुण्य प्राप्ति के लिए इन वस्तुओं का करें दान:
जल से भरा घड़ा (कलश): ज्येष्ठ की भीषण गर्मी में प्यासे को पानी पिलाना अमृत दान के समान है। निर्जला एकादशी पर शीतल जल से भरा घड़ा दान करने से चंद्रमा और जीवन की सकारात्मक ऊर्जा बलवती होती है, जिससे मन को असीम शांति मिलती है।
सत्तू और गुड़: उत्तर भारत की लोक परंपराओं में इस दिन सत्तू के दान का विशेष महत्व है। यह न केवल शरीर को शीतलता प्रदान करता है, बल्कि इसे 'अन्नदान' की श्रेणी में रखकर महापुण्य का कारक माना गया है।
छाता और पंखा: तपती धूप से राहत दिलाने के लिए जरूरतमंदों को छाते का दान करना जीवन में आने वाली बाधाओं से रक्षा करता है। इसी प्रकार, हाथ से चलने वाले पंखे का दान मानसिक शांति और भगवान विष्णु की विशेष कृपा दिलाने वाला माना गया है।
वस्त्र और जूते: वस्त्र दान को मानवीय गरिमा की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। पद्म पुराण के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन श्रेष्ठ ब्राह्मण को जूते दान करता है, वह मृत्यु के पश्चात सोने के विमान में बैठकर स्वर्ग लोक जाता है।
अन्न और मौसमी फल: किसी भूखे को अन्न खिलाना और रसीले फलों का दान करना स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि करता है। इसे सात्विक दान माना गया है जो जीवन में संतुलन लाता है।
पद्म पुराण का विशेष मत: पद्म पुराण में उल्लेख है कि निर्जला एकादशी पर आसन, शय्या (बिस्तर), जल पात्र और गौ दान करना अत्यंत शुभ होता है। ब्राह्मणों को शक्कर के साथ जल के घड़े देना भगवान विष्णु के सान्निध्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

दान नहीं कर सकते तो करें ये काम
दान करने की शक्ति न हो तो प्यासे को पानी पिलाएं। पशु-पक्षियों के लिए भी जल का उचित प्रबंधन करें। निर्जला एकादशी के दिन पानी पिलाना पुण्य माना जाता है। इसके अलावा इस दिन व्रत और पूजा-पाठ करने से जीवन के तमाम कष्ट दूर हो जाते हैं।
पद्मपुराण के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत के प्रभाव से जहां मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वहीं अनेक रोगों की निवृत्ति एवं सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। इस व्रत के प्रभाव से चतुर्दशीयुक्त अमावस्या को सूर्यग्रहण के समय श्राद्ध करके मनुष्य जिस फल को प्राप्त करता है, वही फल इस व्रत की महिमा सुनकर मनुष्य पा लेता है। करोड़ों गोदान करने तथा सैंकड़ों अश्वमेध यज्ञ करने के समान इस व्रत का पुण्यफल है। विभिन्न प्रकार के अन्न एवं वस्त्रों से ब्राह्मणों को प्रसन्न एवं संतुष्ट करने वाले प्राणियों के लिए यह व्रत किसी रामबाण से कम नहीं है। इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य की बीती हुई तथा आने वाली 100 पीढ़ियों को भगवान वासुदेव के परमधाम की प्राप्ति होती है। व्रत रखने के साथ-साथ दान का भी अत्यधिक महत्व है।

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