Neelkanth Mahadev Temple : इतिहास और आस्था का अद्भुत मिलन है नीलकंठ महादेव मंदिर, जानिए इसकी अनसुनी महिमा

punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 05:44 PM (IST)

Neelkanth Mahadev Temple : राजस्थान के अलवर जिले के सरिस्का टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में अरावली की ऊंची पहाडिय़ों और घने जंगलों के बीच स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर आस्था, इतिहास और प्राचीन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है। सरिस्का के गढ़ राजौर गांव में स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर का शांत वातावरण यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को आध्यात्मिक अनुभूति कराता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर और यहां स्थापित शिवलिंग की स्थापना पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान की थी। इसी कारण कई लोग इसे लगभग साढ़े पांच हजार वर्ष पुराना भी मानते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां कभी लगभग 360 छोटे-बड़े मंदिर थे। वहीं इतिहासविदों के अनुसार गढ़ राजौर का इतिहास लगभग 602 ईस्वी से प्रारंभ होता है। उनके अनुसार यहां ऐतिहासिक रूप से 24 मंदिर थे, जिनमें से 7 मंदिर आज भी विद्यमान हैं।

Neelkanth Mahadev Temple

भगवान शिव का वर्तमान मंदिर 959 ईस्वी में निर्मित माना जाता है, जबकि 922 ईस्वी में यहां एक विशाल जैन मंदिर होने का उल्लेख भी मिलता है। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित लगभग साढ़े 4 फुट ऊंचा शिवलिंग है, जिसे नीले अथवा नीलम पत्थर से निर्मित बताया जाता है। इसी कारण इस मंदिर का नाम नीलकंठ महादेव पड़ा। मान्यता है कि महाशिवरात्रि और सावन मास में यह शिवङ्क्षलग दिन में 3 बार प्राकृतिक रूप से अपना रंग बदलता है। गर्भगृह में वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित है, जिसे श्रद्धालु अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक मानते हैं। मंदिर की स्थापत्य कला भी अत्यंत आकर्षक है। इसके शिखर में उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली की स्पष्ट झलक दिखाई देती है, जबकि दीवारों पर देवी-देवताओं, अप्सराओं, नायक-नायिकाओं और अन्य अलंकरणों की अत्यंत महीन नक्काशी की गई है।

Neelkanth Mahadev Temple

मंदिर परिसर तथा आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में प्राचीन मूर्तियां और शिलालेख मिले हैं, जो 8वीं से 11वीं शताब्दी की भारतीय कला और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर माने जाते हैं। यहां की अनेक मूर्तियां अलवर संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं। इतिहासविदों के अनुसार इस क्षेत्र से प्राप्त 2,826 प्राचीन मूर्तियां संग्रहालयों में संरक्षित हैं। शिव-पार्वती की 11वीं शताब्दी की एक प्रतिमा तथा कई शिलालेख अजमेर और अलवर संग्रहालयों में सुरक्षित हैं। ग्रामीणों का मानना है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में यहां की अधिकांश मूर्तियां खंडित कर दी गई थीं, जबकि नीलकंठ महादेव का शिवलिंग सुरक्षित रहा।

मंदिर में पूजा-अर्चना नाथ सम्प्रदाय द्वारा की जाती है। मंदिर के पट प्रतिदिन शाम की आरती के बाद बंद किए जाते हैं, जबकि महाशिवरात्रि की रात मंदिर पूरी रात श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है। श्रावण मास में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं जब राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, मुंबई तथा अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। सावन के दौरान मंदिर परिसर में मेले जैसा वातावरण बन जाता है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठता है। सरिस्का टाइगर रिजर्व आने वाले अधिकांश पर्यटक टाइगर सफारी के साथ नीलकंठ महादेव मंदिर के दर्शन भी अवश्य करते हैं। टहला मार्ग से होकर इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। मार्ग के मुख्य प्रवेश द्वार पर राघवों की कुलदेवी का मंदिर भी स्थित है।

Neelkanth Mahadev Temple

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Content Editor

Sarita Thapa

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