Mokshada Ekadashi 2025: अपना अथवा पितरों का मोक्ष चाहने वाले इस शास्त्रीय विधि से करें व्रत-पूजा और पारण

punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 09:10 AM (IST)

Mokshada Ekadashi 2025: 1 दिसंबर 2025, सोमवार को मोक्षदा एकादशी व्रत है। जो मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष को रखा जाता है। इस रोज भगवान श्रीकृष्ण के मुख से निकली वाणी का दिन गीता जयंती भी है। मोक्षदा एकादशी व्रत से पितरों को मोक्ष और साधक को पापमुक्ति एवं विष्णु कृपा प्राप्त होती है। इस एकादशी की पूजा-विधि अत्यंत सरल और प्रभावशाली मानी गई है।

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Mokshada Ekadashi 2025 puja vidhi मोक्षदा एकादशी 2025: पूर्ण पूजा-विधि
व्रत से पहले की तैयारी (दशमी तिथि)
दशमी की रात हल्का, सात्विक और जल्दी भोजन करें। ब्रह्मचर्य का पालन करें। मन, वचन और कर्म से शुद्धि रखें। घर की सफाई करके पूजा स्थान अलंकृत करें।

मोक्षदा एकादशी की पूजा-विधि
प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान कर साफ़, पीले या सफेद वस्त्र पहनें। मन में संकल्प लें—“मैं आज मोक्षदा एकादशी का व्रत पूरे नियमों सहित कर रहा/रही हूं।”

मोक्षदा एकादशी व्रत संकल्प
तांबे या जल के पात्र में जल, चावल और फूल लेकर संकल्प बोलें—“श्रीहरि विष्णु प्रसन्नता, पितृ मोक्ष एवं पाप नाश के लिए मोक्षदा एकादशी व्रत धारण करता/करती हूं।”

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मोक्षदा एकादशी भगवान विष्णु की पूजा
पूजा स्थान में भगवान श्रीहरि विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
पूजन सामग्री- पंचामृत, गंगा जल, तुलसी दल, पीले पुष्प, धूप-दीप, चंदन, फल व मिठाई

मोक्षदा एकादशी पूजा क्रम
विष्णु जी को गंगाजल से स्नान कराएं। (मानसिक रूप से भी कर सकते हैं)
चंदन, चावल, अक्षत अर्पित करें। पीले फूल चढ़ाएं। तुलसी दल अनिवार्य अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं। धूप दिखाएं। पीले फल व मिठाई का भोग लगाएं।

मोक्षदा एकादशी मंत्र जाप
जिस घर में एकादशी पर यह मंत्र पढ़ा जाए, वहां सदैव विष्णु कृपा बनी रहती है।
मुख्य मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः” (कम से कम 108 बार जाप करें)

विष्णु सहस्रनाम का पाठ अत्यंत शुभ
अगर संभव न हो तो विष्णु चालिसा का पाठ करें।

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मोक्षदा एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें
कथा सुनना व्रत का अनिवार्य अंग है। इससे पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

मोक्षदा एकादशी व्रत नियम
अन्न का सेवन वर्जित है। फलाहार, दूध, पानी, नारियल जल ले सकते हैं। संयम, सौम्यता और सत्य का पालन करें। क्रोध, झूठ, बुरा बोलना वर्जित है।

द्वादशी तिथि के दिन इस विधि से करें पारण
अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण सूर्योदय के बाद तुलसी जल अर्पित करें। विष्णु जी को भोग लगाएं। ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करें (फल, वस्त्र, अन्न, दक्षिणा)। फिर फलाहार करके व्रत का समापन करें।

मोक्षदा एकादशी में क्या दान करें?
पीला वस्त्र, घी, फल, अन्न, तुलसी पौधा, स्वर्ण (यदि संभव हो) इन वस्तुओं का दान करने से पितरों को तत्काल शांति और मोक्ष मिलता है।

मोक्षदा एकादशी का विशेष फल
पितरों को नरक से मुक्ति, जीवन के पापों का शुद्धिकरण, घर में सुख-समृद्धि, मानसिक शांति और विष्णु कृपा का स्थायी वास।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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