Holika Pujan Samigiri List 2026 : होलिका दहन की पूजा-अर्चना सफल बनाने के लिए थाली में जरूर शामिल करें ये सामग्री लिस्ट
punjabkesari.in Sunday, Mar 01, 2026 - 04:44 PM (IST)
Holika Pujan Samigiri List 2026 : होली का त्योहार केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत 'होलिका दहन' की उस पवित्र अग्नि से होती है जो बुराई के अंत और अच्छाई के उदय का प्रतीक है। साल 2026 में, जब हम इस पावन पर्व को मनाने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि हमारी पूजा पूरी विधि-विधान और सही सामग्री के साथ संपन्न हो। अक्सर भागदौड़ में हम कुछ छोटी लेकिन महत्वपूर्ण चीजें भूल जाते हैं, जिससे पूजा का आध्यात्मिक फल अधूरा रह सकता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, होलिका की अग्नि में अर्पित की जाने वाली हर सामग्री का एक विशेष अर्थ होता है। चाहे वह नई फसल की बालियाँ हों या गोबर के उपले। इस बार चंद्र ग्रहण के विशेष संयोग के बीच, सही पूजन सामग्री का चयन आपकी पूजा को और भी फलदायी बना सकता है। तो आइए जानते हैं, कपूर से लेकर कलावा तक, वो कौन सी वस्तुएं हैं जो आपकी होलिका पूजन को सफल और सुख-समृद्धिदायक बनाएंगी।

मुख्य पूजन सामग्री
अक्षत और रोली: पूजा की शुरुआत और तिलक के लिए साबुत चावल (अक्षत) और कुमकुम/रोली।
कच्चा सूत: होलिका की परिक्रमा के समय लपेटने के लिए सफेद सूती धागा।
साबुत हल्दी की गांठ और मूंग: ये वस्तुएं शुभता और आरोग्य का प्रतीक हैं।
बताशे और गुलाल: अग्नि देव को मिठास और रंगों का अर्पण करने के लिए।
सुरक्षा और समृद्धि के प्रतीक
गाय के गोबर की माला (गुलरी/बड़कुल्ले): यह परिवार के सदस्यों के लिए एक 'रक्षा कवच' माना जाता है।
नारियल (सूखा या पानी वाला): पूर्णता के प्रतीक के रूप में अग्नि में अर्पित करने के लिए।
कपूर और धूप: वातावरण की शुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा के संचार के लिए।

नई फसल का नैवेद्य
जौ या गेहूं की बालियां: नई फसल के आने की खुशी और आभार प्रकट करने के लिए इन्हें अग्नि में भूना जाता है।
चना और अन्य अनाज: समृद्धि की कामना के साथ अर्पण करने हेतु।
जल का कलश
पूजा के अंत में और परिक्रमा के दौरान जल की धारा अर्पित करने के लिए एक लोटा या कलश में स्वच्छ जल जरूर रखें।
2026 के लिए विशेष सावधानी
चूंकि 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण है, इसलिए विद्वानों का मत है कि सूतक काल शुरू होने से पहले या ग्रहण समाप्त होने के बाद ही पूजा संपन्न करें।
होलिका दहन का समय: शाम 06:22 से रात 08:50 के बीच।
महत्वपूर्ण टिप: यदि आप ग्रहण के बाद पूजा कर रहे हैं, तो सामग्री में कुशा या तुलसी दल का प्रयोग शुद्धि के लिए किया जा सकता है।
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