Mahavir Jayanti 2026: आज मनाई जाएगी महावीर जयंती, जानें जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर की जीवन यात्रा और उनकी अमर शिक्षाएं
punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 10:27 AM (IST)
Mahavir Jayanti 2026: जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव महावीर जयंती के रूप में हर वर्ष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 31 मार्च को मनाया जाएगा। यह दिन अहिंसा, सत्य और मानवता का संदेश देने वाला विशेष अवसर माना जाता है।

भगवान महावीर की जन्म कथा
भगवान महावीर का जन्म लगभग 599 ईसा पूर्व बिहार के कुंडग्राम में एक राजपरिवार में हुआ था। उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता त्रिशला थीं। जन्म के समय उनके राज्य में समृद्धि बढ़ी, इसलिए उनका नाम वर्द्धमान रखा गया।
कहा जाता है कि बचपन से ही वर्द्धमान बेहद निडर, शांत और करुणामय स्वभाव के थे। उन्होंने छोटी उम्र में ही जीवों के प्रति दया और अहिंसा का भाव दिखाया।
वैराग्य और तपस्या की कथा
30 वर्ष की आयु में वर्द्धमान ने सांसारिक सुखों का त्याग कर सत्य की खोज में घर छोड़ दिया। उन्होंने 12 वर्षों तक कठिन तपस्या और ध्यान किया। इस दौरान उन्होंने हर प्रकार के कष्टों को सहन किया, लेकिन कभी अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए। अंततः उन्हें कैवल्य ज्ञान (पूर्ण ज्ञान) की प्राप्ति हुई और वे भगवान महावीर के रूप में विख्यात हुए।

महावीर स्वामी की शिक्षाएं
भगवान महावीर ने मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए:
अहिंसा परमो धर्म: किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट न पहुंचाना।
सत्य: हमेशा सत्य बोलना और ईमानदारी से जीवन जीना।
अपरिग्रह: जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना।
अस्तेय: बिना अनुमति किसी की वस्तु न लेना।
ब्रह्मचर्य: इंद्रियों पर नियंत्रण रखना।
उनकी शिक्षाएं आज भी जीवन में शांति, संतुलन और सफलता का मार्ग दिखाती हैं।
महावीर जयंती कैसे मनाई जाती है?
महावीर जयंती के दिन जैन मंदिरों को सजाया जाता है और भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है। भव्य शोभायात्राएं (रथ यात्रा) निकाली जाती हैं और उनके उपदेशों का प्रचार किया जाता है।
इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है। लोग गरीबों को भोजन कराते हैं, पशु-पक्षियों की सेवा करते हैं और अहिंसा का संकल्प लेते हैं।
महावीर जयंती का महत्व
यह पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने का अवसर है। भगवान महावीर की शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि हमारे विचारों और आचरण में छिपा होता है।
महावीर जयंती हमें यह प्रेरणा देती है कि हम अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और संयम को अपनाएं। यदि इन सिद्धांतों को जीवन में उतार लिया जाए, तो हर व्यक्ति एक शांत, सफल और संतुलित जीवन जी सकता है।

