Mahashivratri 2020: शिव की बारात में आईं थी भूतों की टोली, देख देवी पार्वती भी गई थीं सहम

2020-02-14T15:47:06.473

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वैसे तो साल के 12 महीनों में शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है परंतु फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को पड़ने वाला महाशिवरात्रि त्यौहार का अधिक महत्व होता है। क्योंकि इस दिन से कईं मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जिनके अनुसार इस दिन शिवलिंग का प्राक्ट्य हुआ था। तथा शिव-पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। यही मुख्य कारण है कि इस दौरान भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा होती है। चूंकि ऐसा मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था इसलिए कहा जाता है जिन लोगों की शादीशुदा में परेशानियां आ रही हों या जिस किसी की शादी न हो रही हो, इसलिए इस दिन एक साथ भोलेनाथ व मां गौरी की पूजा करनी चाहिए।
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शास्त्रों में इनके विवाह को लेकर एक बड़ी ही रोचक कथा उल्लेखित है, जिसमें बताया गया है घोर तप करने के बाद शिव को पाने वाली मां पार्वती अपनी विवाह के दौरान डर गई थीं। आईए जानते हैं इस कथा के बारे में-

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक समस्त देवताओं ने देवी पार्वती की तरफ़ से विवाह का प्रस्ताव लेकर कन्दर्प को भगवान शिव के पास भेजा, जिसे शिव जी द्वारा ठुकरा दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि क्रोधित होकर अपनी तीसरी आंख से उसे भस्म कर दिया।

परंतु देवी पार्वती ने तो भोलेनाथ को अपना पति मान ही लिया था। इसीलिए उन्होंने शिव जी को पाने के लिए कठोर तपस्या शुरू की। उनकी कठोर तपस्या को देखकर सभी जगह हाहाकार मच गया। तब शिव शंकर ने अपनी आंखें खोलीं और देवी पार्वती से कहा कि वो किसी राजकुमार से शादी कर लें, क्योंकि उनके साथ रहना सरल नहीं हैं।
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किंतु देवी पार्वती ने उन्हें कहा कि अगर वो विवाह करेंगी तो सिर्फ़ आप से। देवी पार्वती का अपने लिए असीम प्रेम देख भोलेनाथ उनसे विवाह करने के लिए तैयार हो गए। क्योंकि शिव जी देवताओं के साथ-साथ दानवों के भी इष्ट मानें जाते हैं इसलिए जब भगवान शंकर जब पार्वती से विवाह करने गए तब उनके साथ समस्त भूत-प्रेत तथा आत्माएं भी थीं।

शिव की इस अनोखी बारात को देखकर सभी देवता हैरान हो गए। बल्कि मां पार्वती भी भोलेनाथ की बारात देखकर डर गईं। शिव जी के इस विचित्र रूप को देखकर देवी पार्वती की मां उन्हें स्वीकार नहीं कर पाईं और उन्होंने अपनी बेटी का हाथ उनके हाथ में देने से मना कर दिया।

स्थिति को बिगड़ता देख देवी पार्वती ने भगवान शंकर से प्रार्थना की, कि वो उनके रीति रिवाजों के मुताबिक तैयार होकर आएं। भगवान शंकर ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार किया और सभी देवताओं को आदेश दिया कि वो उनको तैयार करें। ये सुन सभी देवता हरकत में आ गए और उन्हें तैयार करने में जुट गए।
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Jyoti

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