जानिए, कब और कैसे लिंग रूप में प्रकट हुए महादेव?

02/05/2020 6:51:40 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
21 फरवरी, 2020 को इस साल की महाशिवरात्रि पड़ रही है। जो न केवल भारत देश में बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी ही धूम-धाम से मनाई जाती है। कहते हैं भोलेनाथ के भक्तों को सारा साल इस तिथि का इंतज़ार होता है। वैसे तो प्रत्येक माह में त्रयोदशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का मनाई जाती है। परंतु जिसका धार्मिक शास्त्रों में अधिक महत्व है वो महा शिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का मनाई जाती है। मगर मासिक शिवरात्रि तथा महाशिवरात्रि में अंतर क्या है और क्यों मासिक शिवरात्रि से अधिक महत्व महाशिवरात्रि को क्यों दिया जाता है?
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दरअसल इसका कारण है इनसे जुड़े पौराणिक कारण। जी हां, महाशिवरात्रि से जुड़ी कुछ ऐसी किंवदंतियां हैं जिस कारण इसका महत्व अधिक है। चलिए हम आपको बताते हैं इससे जुड़ी एक ऐसी जानकारी जिसके बारे में आप में बहुत से लोग आज भी रूबरू नहीं है। 

पौराणिक कथाओं की मानें तो फाल्गुन मास के कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। तो वहीं इससे जुड़ी एक अन्य कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था। जिसके उपलक्ष्य में मंदिरों से भगवान शिव की बरात भी निकाली जाती है और विधि-विधान के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह भी करवाया जाता है। 
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ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव मानव जाति के सबसे निकट होते हैं। यही कारण है कि लोग रात में भगवान शिव की आराधना में जागरण करते हैं। 

अविवाहित महिलाएं इस दिन भगवान शिव की प्रार्थना करती हैं ताकि उन्हें अच्छा वर मिले। वहीं, विवाहित महिलाएं पति और परिवार के लिए व्रत करती हैं। इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए बेलपत्र और जल से अभिषेक किया जाता है। शिवरात्रि को महान अनुष्ठानों का दिन माना जाता है। इस दिन रुद्राभिषेक करने के साथ शिव के नामों का उच्चारण किया जाता है। इस दिन ऊँ नमः शिवाय का जप करना बहुत ही लाभदायक माना जाता है। इस दिन रात्रि में चारो पहर पूजा करने का भी विधान है। भगवान शिव के अभिषेक में पहले पहर में दूध, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद का इस्तेमाल करना बहुत ही शुभ माना जाता है।
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Jyoti

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