Holika Dahan 2026 : 2 मार्च को कब जलेगी होलिका, जानें अपने शहर का सही मुहूर्त

punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 09:41 AM (IST)

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Holika Dahan 2026 : होलिका दहन को धर्म की जीत और अधर्म के अंत का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से इसे शास्त्रों में बताए गए शुभ समय पर करना जरूरी बताया गया है, ताकि पूजा का सकारात्मक प्रभाव मिले और घर-परिवार में मंगल ऊर्जा का संचार हो। विशेष रूप से भद्रा काल का ध्यान रखना आवश्यक माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस समय होलिका दहन करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होते।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि भद्रा के दौरान किया गया दहन अशुभ परिणाम दे सकता है। इसलिए विद्वान हमेशा सलाह देते हैं कि भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाए। अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और तिथि के अनुसार मुहूर्त बदल जाता है, इसलिए स्थान अनुसार सही समय जानना जरूरी होता है।

Holika Dahan 2026

क्यों 2 मार्च को होलिका दहन श्रेष्ठ माना जा रहा है

होलिका दहन फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में करना शुभ माना जाता है। वर्ष 2026 में फाल्गुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 3 मार्च को शाम 5 बजकर 7 मिनट पर समाप्त होगी।

3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी लग रहा है, जो शाम तक प्रभाव में रहेगा। चूंकि पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को जल्दी समाप्त हो जाएगी और ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए ज्योतिषीय दृष्टि से 2 मार्च की संध्या को होलिका दहन करना अधिक उचित और शुभ माना जा रहा है।

शहर अनुसार होलिका दहन 2026 का समय

देश के विभिन्न शहरों में प्रदोष काल अलग-अलग समय पर रहेगा। 

आपके शहर में होलिका दहन 2026 मुहूर्त

दिल्ली - शाम 6.20 - रात 8.50
भोपाल - शाम 6.24 - रात 8.51
लखनऊ - शाम 06.08 - रात 8.36
पटना - शाम 5.52 - रात 8.20
मुंबई - शाम 6.44 - रात 9.11
चंडीगढ़ - शाम 6.23 - रात 8.51
शिमला - शाम 6.21 - रात 8.50
जयपुर - शाम 6.29 - रात 8.57
वाराणसी - शाम 06.01 - रात 8.28
रायपुर - शाम 06.08 - रात 8.35
बेंगलुरू - शाम 6.29 - रात 8.54
चेन्नई - शाम 6.18 - रात 8.43
हैदराबाद - शाम 6.23 - रात 8.49
ईटानगर - शाम 5.17 - रात 7.45
कोलकाता - शाम 5.41 - रात 8.08
भुवनेश्वर - शाम 5.52 - रात 8.19
नागपुर - शाम 6.19 - रात 8.45
अहमदाबाद - शाम 6.43 - रात 9.11
रांची - शाम 5.53 - रात 8.20

Holika Dahan 2026

इसी तरह अन्य शहरों में भी सूर्यास्त और स्थानीय समय के अनुसार मुहूर्त तय रहेगा।

भद्रा काल में दहन क्यों वर्जित है
धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा काल में किया गया कोई भी शुभ कार्य अपेक्षित फल नहीं देता। शास्त्रीय श्लोकों में भी कहा गया है कि समझदार व्यक्ति को भद्रा में दहन नहीं करना चाहिए, क्योंकि उस समय किए गए कार्य का परिणाम विपरीत हो सकता है।

इसी कारण परंपरा है कि भद्रा समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन किया जाए, ताकि पूजा का पूर्ण लाभ और सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों।


Holika Dahan 2026


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Content Editor

Prachi Sharma

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