Magha Amavasya Remedies : माघ अमावस्या की रात इन स्थानों पर दीप जलाने से बदलती है किस्मत

punjabkesari.in Sunday, Jan 18, 2026 - 12:28 PM (IST)

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Magha Amavasya Remedies : माघ मास की अमावस्या, जिसे मौनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्म में आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। वर्ष 2026 में यह तिथि दान, स्नान और विशेष रूप से दीपदान के लिए चमत्कारी परिणाम देने वाली मानी जा रही है। शास्त्रों के अनुसार, माघ अमावस्या के दिन पवित्र नदियों में देवताओं का वास होता है। इस रात किए गए कुछ विशेष उपाय न केवल पितृ दोष से मुक्ति दिलाते हैं बल्कि सोया हुआ भाग्य भी जगा सकते हैं। आइए जानते हैं माघ अमावस्या की रात उन विशेष स्थानों के बारे में, जहाँ दीप जलाने से जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।

Magha Amavasya Remedies

मुख्य द्वार पर दीप

अमावस्या की रात सबसे अंधेरी होती है। माना जाता है कि इस रात नकारात्मक शक्तियां सक्रिय होती हैं, जिन्हें दूर रखने के लिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना अनिवार्य है। संध्याकाल में घर के मुख्य दरवाजे के दोनों ओर घी या सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इससे माता लक्ष्मी का मार्ग प्रशस्त होता है और घर में दरिद्रता का प्रवेश नहीं होता।

पीपल के वृक्ष के नीचे
हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष में त्रिदेव के साथ-साथ पितरों का वास माना गया है। माघ अमावस्या पर पीपल की पूजा का विशेष फल मिलता है। रात के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं। यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष या शनि दोष है, तो यह उपाय उसे शांत करता है। इससे व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

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घर के ईशान कोण में
घर का उत्तर-पूर्वी कोना देवताओं का स्थान होता है। अमावस्या की रात इस स्थान को खाली या अंधेरे में नहीं छोड़ना चाहिए। यहां गाय के शुद्ध घी का एक दीपक जलाएं। दीपक में रुई की बाती के स्थान पर लाल रंग के धागे की बाती का प्रयोग करना अधिक शुभ होता है। इससे घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है।

 तुलसी के पौधे के पास
तुलसी को विष्णुप्रिया कहा गया है। माघ अमावस्या पर तुलसी के पास दीप दान करने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं। अमावस्या पर तुलसी को जल न छुएं, केवल पास में दीपक जलाएं। घर में हो रहे कलह-कलेश शांत होते हैं और शांति का वास होता है।

पवित्र नदी के तट पर या दक्षिण दिशा की ओर
यदि आप किसी पवित्र नदी के किनारे जा सकते हैं, तो वहां दीपदान अवश्य करें। यदि संभव न हो, तो घर की दक्षिण दिशा में एक गहरा दीपक जलाएं। दक्षिण दिशा यम और पितरों की दिशा मानी जाती है। अमावस्या की रात दक्षिण मुखी दीपक जलाने से पितर तृप्त होते हैं। पितरों के आशीर्वाद से संतान सुख और वंश वृद्धि में आ रही रुकावटें खत्म होती हैं।

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Content Editor

Prachi Sharma

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