Magh Purnima Katha : माघ पूर्णिमा पर जरूर पढ़ें ये पवित्र कथा, खुलेंगे मोक्ष के द्वार
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 03:31 PM (IST)
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Magh Purnima Katha : धार्मिक ग्रंथों में माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई कथाओं का उल्लेख मिलता है। इन्हीं में से एक प्रसिद्ध कथा एक ब्राह्मण शुभव्रत से संबंधित है।प्राचीन समय में नर्मदा नदी के तट पर शुभव्रत नाम का एक विद्वान ब्राह्मण रहता था। उसे वेद-शास्त्रों का अच्छा ज्ञान था, लेकिन उसके मन में धन के प्रति अत्यधिक लालच था। वह हर समय अधिक से अधिक धन कमाने की सोच में लगा रहता था, चाहे उसके लिए सही रास्ता अपनाए या गलत। इसी लालच और मानसिक तनाव के कारण वह समय से पहले ही कमजोर और बीमार रहने लगा।
जीवन के इस कठिन दौर में एक दिन शुभव्रत को अपनी गलतियों का एहसास हुआ। उसे महसूस हुआ कि उसने पूरा जीवन केवल धन के पीछे दौड़ते हुए व्यर्थ कर दिया है और अब उसे अपने जीवन को सही दिशा देनी चाहिए। तभी उसे माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान के महत्व से जुड़ा एक श्लोक याद आया।
इस प्रेरणा से उसने माघ महीने में नर्मदा नदी में नियमित स्नान करने का संकल्प लिया। वह प्रतिदिन श्रद्धा और भक्ति के साथ नदी में स्नान करने लगा। लगभग नौ दिनों तक उसने इस नियम का पालन किया। हालांकि, उसकी शारीरिक स्थिति दिन-ब-दिन कमजोर होती गई और उसे अपने अंत का आभास होने लगा।
मृत्यु के निकट पहुंचकर शुभव्रत को अपने पुराने कर्मों पर पश्चाताप होने लगा। उसे लगा कि उसने जीवन में कभी कोई पुण्य कार्य नहीं किया, इसलिए उसे परलोक में कष्ट भोगना पड़ेगा। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा कुछ और ही थी।
माघ मास में किए गए पवित्र स्नान और उसकी सच्ची भक्ति के कारण भगवान विष्णु उस पर प्रसन्न हुए। उसके पिछले दोषों को क्षमा कर दिया गया और उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। इस प्रकार शुभव्रत का जीवन यह संदेश देता है कि सच्चे मन से किया गया एक छोटा-सा पुण्य कर्म भी जीवन को नई दिशा दे सकता है।
