Lohri 2026 : क्यों मनाया जाता है लोहड़ी का पर्व, जानें इसके पीछे की वो दिलचस्प वजहें जो शायद आप नहीं जानते !
punjabkesari.in Sunday, Jan 11, 2026 - 01:03 PM (IST)
Lohri 2026 : जैसे ही सर्द हवाओं के बीच पंजाब के खेतों में सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, उत्तर भारत एक सुनहरे उत्सव के स्वागत की तैयारी में जुट जाता है। लोहड़ी यह केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने का एक जीवंत माध्यम है। मकर संक्रांति की पूर्व संध्या पर मनाया जाने वाला यह पर्व हमें एक ओर जहां दुल्ला भट्टी जैसे नायक की वीरता और त्याग की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर यह किसानों की कड़ी मेहनत और नई फसल की खुशहाली का जश्न भी है। कड़ाके की ठंड की विदाई और सूर्य के उत्तरायण होने के इस मिलन बिंदु पर, लोहड़ी की पवित्र अग्नि हमारे जीवन से नकारात्मकता को जलाकर नई उम्मीदों का संचार करती है। तो आइए जानते हैं लोहड़ी के पर्व को मनाने की वजह के बारे में-

दुल्ला भट्टी की गौरवशाली गाथा
अकबर के शासनकाल में दुल्ला भट्टी नाम का एक व्यक्ति पंजाब में रहता था। वह एक विद्रोही था, जिसे पंजाब का रॉबिनहुड कहा जाता था। उस समय कुछ अमीर सौदागर गरीब लड़कियों को गुलामी के लिए बेच दिया करते थे। दुल्ला भट्टी ने न केवल उन लड़कियों को मुक्त कराया, बल्कि उनकी शादी हिंदू लड़कों से करवाई और कन्यादान की रस्म भी खुद निभाई। यही कारण है कि लोहड़ी के गीतों में 'सुंदर मुंदरिये' बोल गाए जाते हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता है।
नई फसल का अभिनंदन
लोहड़ी मुख्य रूप से किसानों का त्योहार है। इस समय तक रबी की फसल खेतों में लहलहाने लगती है। किसान अपनी मेहनत के सफल होने की खुशी में अग्नि देव की पूजा करते हैं। वे अग्नि में तिल, गुड़ और मक्का अर्पित कर आने वाले साल में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

सूर्य का उत्तरायण होना
खगोलीय दृष्टि से देखें तो लोहड़ी की रात साल की सबसे लंबी रातों में से एक मानी जाती है। इसके अगले दिन यानी मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होने लगता है, जिसका अर्थ है कि अब दिन बड़े होंगे और धीरे-धीरे कड़ाके की ठंड कम होने लगेगी। लोहड़ी की आग इसी बदलते मौसम और नई ऊर्जा के स्वागत का प्रतीक है।
परिवार में नई खुशियां
भारतीय परंपरा में लोहड़ी उन घरों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है जहां नई शादी हुई हो या बच्चे का पहला साल हो। इसे नई शुरुआत का शुभ संकेत माना जाता है, जहां पूरा मोहल्ला और रिश्तेदार मिलकर जश्न मनाते हैं।

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