जानिए, हिमालय की गोद में बसी सतोपंथ झील का महाभारत से क्या है संबंध

2019-12-11T17:03:49.25

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
एक तरफ़ जहां भारत में स्थित धार्मिक स्थल हमारे देश को सबसे भिन्न व प्राचीन बनाते हैं तथा प्रसिद्धि हासिल करवाते हैं। तो वहीं दूसरी ओर यहां कुछ ऐसे सरोवर और झीलें हैं जो कहीं न कहीं धार्मिक महत्व रखते हैं। इनमें से लगभग झीलों का ऊंचाई पर बसे होने के कारण इन तक पहुंचना अधिक कठिन है। हिमालय की गोद में बसी ये खूबसूरत झीलों के नज़ारे मन को लुभाते हैं। इन्हीं में से एक है सतोपंथ झील जो कई रहस्यों और किंवदंतियों से भरा हुई है। बता दें ये झील उत्तराखंड में स्थित है, जो यहां के प्राकृतिक झीलों में से एक है।
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बताया जाता है यह झील न सिर्फ़ धार्मिक लिहाज़ से बल्कि अपने अद्वितीय प्राकृतिक सौंदर्य के चलते भी विश्व के पर्यटन मानचित्र में दर्ज़ है। आप में से जिन लोगों ने कभी झील देखी होगी वो जानते होंगे कि अक्सर प्राकृतिक झीलों का आकार गोल या चौकोर होता है परंतु इस अद्वितीय झील का आकार त्रिभुजाकार या तिकोने है। जिस कारण ये झील न केवल भारतीय पर्यटकों को बल्कि विदेशों से आए लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां आए लोग इस झील की खूबसूरती को तो निहारते हैं साथ ही यहां से मिलने वाली अद्भुत शांति और इसकी सुंदरता के भी कायल हो जाते हैं। बता दें सतोपंथ झील के नाम का अर्थ है सत्य का रास्ता। शास्त्रों के अनसार  'सतो' मतलब 'सत्य' और 'पंथ' मतलब 'रास्ता' तो यानि मतलब हुआ 'सत्य का रास्ता'।
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तो चलिए करते हैं इस धार्मिक, पौराणिक और पवित्र झील के दर्शन तथा साथ ही जानते हैं इससे जुड़ी कुछ खास बातें-
उत्तरखंड में हिमालय पर्वत के चौखंबा शिखर की तलहटी पर बसा सतोपंथ झील एक हिमरूप झील है, जिसे उत्तराखंड के सुरम्य झीलों में से एक माना जाता है। वैसे तो इन पवित्र धार्मिक झीलों से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से दो कथाएं अधिक प्रचलित हैं। एक के अनुसार महाभारत के पांडव भाई इसी मार्ग से होते हुए 'स्वर्ग के रास्ते' की ओर गए थे। दजिस कारण इस झील को सतोपंथ झील नाम दिया गया। कुछ मान्यताओं के अनुसार इसे धरती पर स्वर्ग जाने का रास्ता भी कहा जाता है।
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इससे जुड़ी एक कथा के अनुसार पांडवों ने स्वर्गारोहिणी (स्वर्ग की सीढ़ियां) से स्वर्ग जाने से पहले इसी स्थान पर स्नान ध्यान किया था। यही कारण है कि स्थान हिंदू धर्म के लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। इसके अलावा कहा ये भी जाता है कि युधिष्ठिर को इसी झील के समीप स्वर्ग तक जाने के लिए 'आकाशीय वाहन' की प्राप्ति भी हुई थी।

इस झील के त्रिभुजाकार होने के पीछे भी एक कथा जुड़ी हुई है कि जो इस प्रकार है कि एकादशी के दिन यहां त्रिदेव- ब्रह्मा, विष्णु महेश इस झील में पधारे थे और तीनों देवताओं ने झील के अलग-अलग कोनों पर खड़े होकर पवित्र डुबकी लगाई। इसलिए कहा जाता है कि यह झील त्रिभुज के आकार में है।


Jyoti

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