Kedarnath Yatra 2026: 22 अप्रैल को खुलेंगे केदारनाथ के द्वार, जानें भीम और मायावी बैल का वो रहस्य, जिससे शुरू हुई यह पावन परंपरा!
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 11:24 AM (IST)
Kedarnath Yatra 2026: उत्तराखंड की देवभूमि में आस्था का महाकुंभ यानी 'चारधाम यात्रा 2026' का बिगुल बज चुका है। हिमालय की बर्फीली वादियों में विराजमान बाबा केदार के भक्तों के लिए बड़ी खबर है। 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट पूरी श्रद्धा के साथ खोल दिए जाएंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस दर पर आज लाखों लोग माथा टेकते हैं, वहां पहुंचने की परंपरा
कैसे और क्यों शुरू हुई?

पांडवों के पश्चाताप से जुड़ा है इतिहास
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिव्य यात्रा की जड़ें महाभारत काल से जुड़ी हैं। युद्ध के बाद पांडव अपने गोत्र वध के पापों से मुक्ति चाहते थे और भगवान शिव की शरण में जाना चाहते थे। मगर महादेव उनसे रुष्ट थे और उन्होंने बैल (नंदी) का रूप धर कर गुप्तकाशी में शरण ले ली।

जब भीम ने पकड़ी महादेव की पूंछ!
जब पांडवों को भगवान शिव के बैल रूप में होने का आभास हुआ, तो उन्होंने उन्हें खोजने की कोशिश की। जैसे ही शिव जी भूमि में समाने लगे, महाबली भीम ने बैल का पिछला हिस्सा (कुबड़) मजबूती से पकड़ लिया। आज केदारनाथ में उसी पिंड (कुबड़) की पूजा होती है। मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप धूल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पंचकेदार की उत्पत्ति का अद्भुत रहस्य
कहा जाता है कि शिव के शरीर के अलग-अलग हिस्से पांच स्थानों पर प्रकट हुए, जिन्हें पंचकेदार कहा जाता है:
केदारनाथ: कुबड़ (पिंड)
तुंगनाथ: भुजाएं
रुद्रनाथ: मुख
मध्यमहेश्वर: नाभि
कल्पेश्वर: जटाएं
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आदि शंकराचार्य ने दिया आधुनिक स्वरूप
सदियों पुरानी इस परंपरा को 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने एक नया जीवन दिया। उन्होंने ही जर्जर हो चुके मंदिर का पुनरुद्धार किया और चारधाम यात्रा को एक संगठित स्वरूप प्रदान किया, जिससे यह हिंदू धर्म का सबसे पवित्र केंद्र बन गया।
Kedarnath Yatra 2026 opening date: आपकी सुविधा के लिए बता दें कि चारधाम यात्रा का विधिवत आगाज़ 19 अप्रैल से हो रहा है। यदि आप भी इस वर्ष बाबा के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो रजिस्ट्रेशन और तैयारियों की जानकारी समय रहते जुटा लें।

