श्रीराम के वियोग में हनुमान जी ने क्या किया ? पढ़े बजरंगबली की रहस्य से भरी कहानी
punjabkesari.in Monday, May 18, 2026 - 04:00 PM (IST)
Hanuman Ji story : भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रेम, भक्ति और समर्पण की कथा तो हम सभी जानते हैं। कहा जाता है कि हनुमान जी केवल भगवान राम के सबसे बड़े भक्त ही नहीं थे, बल्कि वे उनके अनन्य सेवक और परम प्रिय भी थे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब भगवान श्रीराम ने सरयू नदी में जल समाधि लेकर अपने धाम प्रस्थान किया, तब उनके सबसे प्रिय भक्त हनुमान जी का क्या हुआ? आखिर अपने प्रभु के पृथ्वी लोक छोड़ने के बाद हनुमान जी कहां गए उनके साथ क्या हुआ। तो आइए जानते हैं इससे जुड़ी कथा के बारे में-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम जगत के पालनहार भगवान विष्णु के ही अवतार थे। भगवान राम का ये अवतार मानव रूप में था यानि के उन्होंने मानव देह धारण की थी, इसी वजह से वे जानते थे कि एक न एक दिन उन्हें इस संसार के नियम के पालन हेतु ये संसार रूपी देह का त्याग करना ही होगा। जब श्री राम के अंत का समय आया तो उनके साथ-साथ उनके प्रियजनों ने भी जल समाधि ली थी सिर्फ हनुमान जी को छोड़कर क्योंकि कथाओं के अनुसार माना जाता है कि श्रीराम चाहते थें कि हनुमान जी इसी पृथ्वी पर रहें। श्री राम इस बात से अच्छी तरह से परिचित थे कि हनुमान जी के रहते वह आसानी से अपने शरीर का त्याग नहीं कर सकते। इसके लिए उन्होंने हनुमान जी को किसी और कार्य में उलझाने के बारे में सोचा।
जब जल समाधि लेने का समय आया तब, श्री राम ने एक दरार में अपनी अंगूठी गिरा दी और हनुमान जी को बुलाया और कहा कि मेरी अंगूठी इस महल की दरार में गिर गई है और उन्होंने ने हनुमान जी को वो अंगूठी ढूंढने को बाहर निकालने को कहा। अपने प्रभु श्री राम की बात सुनते ही हनुमान जी ने उस अंगूठी को ढूंढना शुरू दिया। अंगूठी को ढूंढते-ढूंढते हनुमान जी नागलोक तक चले गए। वहां जाकर वह नागों के राजा वासुकी से मिले और अपने आने के उद्देश्य के बारे में बताने लगे। वासुकी हनुमान जी को नागलोक के बीचों बीच ले गए और उन्हें अंगूछियों के लगे ढेर की और इशारा करते हुए उनसे अंगूठी ढूंढने के लिए कहा। वहां अंगूठियों का ढेर लगा देखकर हनुमान जी सोच में पड़ गए क्योंकि वहां पर हर अंगूठी पर श्री राम लिखा हुआ था।
हनुमान जी जान गए कि श्री राम ने उन्हें जानबुझकर यहां भेजा है। हनुमान जी उदास देखकर नागराज वासुकी ने उन्हें समझाया कि भगवान श्री राम को एक न एक दिन इस संसार को त्यागना ही था और अभी तक तो वह संसार को त्याग चुके होंगे। हनुमान जी को जब इस बात का आभास हुआ तो उन्होंने अयोध्या न लौटने का निर्णय किया क्योंकि उन्होनें सोचा कि जहां मेरे प्रभु श्री राम ही नहीं वहां जाकर मैं क्या करूंगा। कहते हैं कि हनुमान जी अयोध्या न लौटकर यहां से दूर किंपुरुष नामक लोक में चले गए। पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ये एक ऐसा लोक माना गया है जहां वानर, किन्नर, यक्ष आदि जैसे जीव वास करते हैं। इस स्थान को स्वर्ग के समान ही माना गया है। कहा जाता है कि उस लोक में सदा श्री राम के गुणों का गान किया जाता है।
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