महादेव की नगरी काशी विश्वनाथ धाम में युवाओं का बोलबाला, 2025 में 7.26 करोड़ पर्यटकों ने रचा इतिहास

punjabkesari.in Saturday, Jan 03, 2026 - 10:06 AM (IST)

Kashi Vishwanath Dham : महादेव की नगरी अब केवल वृद्धों की मोक्ष स्थली नहीं, बल्कि दुनिया भर के युवाओं के लिए 'स्पिरिचुअल हब' बन चुकी है। साल 2025 काशी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है, क्योंकि इस एक वर्ष में यहां 7.26 करोड़ से अधिक पर्यटकों और श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

80% युवाओं की भारी भागीदारी 
इस बार के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली और सुखद बात यह रही कि काशी आने वाले पर्यटकों में 80 फीसदी युवा (18 से 35 वर्ष की आयु वर्ग) थे। आधुनिक पीढ़ी का यह रुझान दर्शाता है कि अब युवा अपनी संस्कृति और जड़ों की ओर तेजी से लौट रहे हैं। रील मेकिंग से लेकर गंगा आरती के शांतिपूर्ण अनुभवों तक, युवाओं ने काशी को सोशल मीडिया पर भी 'ग्लोबल' बना दिया है।

सैक्रेड ट्रायएंगल का जादू
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकसित किए जा रहे 'Sacred Triangle' (काशी-अयोध्या-प्रयागराज) प्रोजेक्ट का असर साफ दिखा।
 प्रयागराज महाकुंभ में संगम स्नान करने वाले करीब 2.87 करोड़ श्रद्धालु 'पलट प्रवाह' के रूप में काशी पहुंचे, जिससे संख्या में भारी उछाल आया। अयोध्या में राम मंदिर और काशी में विश्वनाथ कॉरिडोर के कारण पर्यटकों के लिए एक ही यात्रा में तीनों धामों के दर्शन करना सुलभ हो गया है।

त्योहारों पर उमड़ा जन-सैलाब
72 घंटे का रिकॉर्ड: साल के अंत (दिसंबर 2025) और 2026 की शुरुआत के महज 3 दिनों में ही 15 लाख भक्त बाबा के दरबार पहुंचे। इन पवित्र अवसरों पर बाबा विश्वनाथ मंदिर में पैर रखने की जगह नहीं थी, जिसके लिए प्रशासन को पहली बार क्राउड मैनेजमेंट के लिए AI तकनीक का सहारा लेना पड़ा। 24 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 के बीच 30.75 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।

क्यों बढ़ी पर्यटकों की संख्या?
कॉरिडोर बनने के बाद गंगा घाट से सीधे मंदिर तक पहुंचना आसान हो गया है। 2200 से अधिक होटल, 1500 से ज्यादा पेइंग गेस्ट हाउस और बेहतर सड़कों ने काशी को 'टूरिस्ट फ्रेंडली' बना दिया है। अलकनंदा क्रूज और गंगा के घाटों पर होने वाले लाइट एंड साउंड शो ने विदेशी सैलानियों को भी आकर्षित किया है।

आर्थिक प्रभाव
पर्यटन के इस विस्फोट ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा दी है। बनारसी साड़ी उद्योग, होटल व्यवसाय, नाविकों और हस्तशिल्पियों की आय में 40% तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Sarita Thapa

Related News