Karva Chauth: 70 साल बाद शुभ संयोग में है 24 अक्टूबर को करवा चौथ का व्रत !

10/16/2021 8:51:19 AM

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Karva Chauth 2021: करवा चौथ का व्रत पूरे देश में सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही खास माना जाता है और दांपत्य जीवन के लिए भी बहुत महत्व रखता है। बहुत सी कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर व अच्छा पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। करवा चौथ के व्रत को सबसे महत्वपूर्ण व सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है। सुहागिन स्त्रियां पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से करवा चौथ का व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती हैं।

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इस व्रत को बहुत कठिन माना जाता है क्योंकि इसमें जल तक का सेवन नहीं किया जाता। इस व्रत में श्रृंगार का भी खूब महत्व होता है। रात को चांद के दर्शन और पूजा के बाद पति के हाथों से सुहागिने जल ग्रहण करती हैं। करवा चौथ में चांद का दर्शन और पूजा का विशेष महत्व होता है। सुबह से निर्जला व्रत रखते हुए जब रात को चांद के दर्शन होते हैं तब करवा चौथ का व्रत पूरा माना जाता है।

करवाचौथ' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है, 'करवा' यानी 'मिट्टी का बरतन' और 'चौथ' यानि 'चतुर्थी'। इस त्योहार पर मिट्टी के बरतन यानी करवे का विशेष महत्व माना गया है। सभी विवाहित स्त्रियां साल भर इस त्योहार का इंतजार करती हैं और इसकी सभी विधियों को बड़े श्रद्धा भाव से पूरा करती हैं।

Karwa Chauth 2021 Date: इस बार करवा चौथ का व्रत 24 अक्टूबर रविवार को बहुत ही शुभ योग में पड़ रहा है। 24 अक्टूबर को कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस तिथि को करवा चौथ कहा जाता है। इस तिथि को संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। इस साल करवा चौथ का चांद रोहिणी नक्षत्र में निकलेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार रोहिणी नक्षत्र को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन चंद्रमा का गोचर वृषभ राशि में रहेगा, जो चंद्रमा की उच्च राशि है।

Karwa chauth 2021 date and day: इस बार 70 साल बाद करवाचौथ पर रोहिणी नक्षत्र और मंगल का योग एक साथ आ रहा है। यह योग करवाचौथ को और अधिक मंगलकारी बना रहा है।  इससे पूजन का फल हजारों गुना अधिक होगा।

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इस बार पूजा का शुभ मुहूर्त- 24 अक्टूबर शाम को 6 बजकर 55 मिनट से रात्रि 8 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। वैसे तो चांद निकलने का समय रात्रि 8 बजकर 11 मिनट पर है लेकिन अलग-अलग शहरों में चांद निकलने के समय में बदलाव हो सकता है। 

इस व्रत के पौराणिक महत्व के बारे में यह बताना चाहूंगा कि पौराणिक कथा के अनुसार जब देवता और दैत्यों के बीच भयंकर युद्ध आरंभ हुआ था तो युद्ध में देवताओं पर राक्षस भारी पड़ने लगे थे । ऐसे में देवता ब्रह्म जी के पास गए और रक्षा की प्रार्थना की। ब्रह्मा जी ने कहा कि इस संकट से बचने के लिए सभी देवताओं की पत्नियों को अपने-अपने पतियों के लिए व्रत रखना चाहिए और सच्चे दिल से उनकी विजय के लिए प्रार्थना करनी चाहिए।

मान्यता है कि तभी से करवा चौथ के व्रत को रखने की परंपरा आरंभ हुई। एक अन्य कथा के अनुसार भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए माता पार्वती ने भी इस कठिन व्रत को रखा था। ऐसी भी मान्यता है कि करवा चौथ का व्रत विधि पूर्वक करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है।

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करवाचौथ व्रत की पूजा विधि
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लें।

सरगी के रूप में मिला हुआ भोजन करें, पानी पीएं और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें। इस पावन दिन शिव परिवार की पूजा-अर्चना की जाती है।

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।

माता पार्वती, भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय की पूजा करें।

करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है।

चंद्र दर्शन के बाद पति को छलनी से देखें। इसके बाद पति द्वारा पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तोड़ा जाता है।

गुरमीत बेदी
gurmitbedi@gmail.com

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Content Writer

Niyati Bhandari

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