Kanya sankranti: मंद पड़ा व्यवसाय सफलता के शिखर छूने लगेगा

2020-09-16T09:03:34.647

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

Kanya sankranti: जब नवग्रहों के राजा एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं तो हिन्दू धर्म में उसे संक्रांति कहा जाता है। जैसे 1 साल में 12 महीने होते हैं वैसे ही कुल 12 संक्रांतियां होती हैं। आज कन्या संक्रांति है। जब कन्या संक्रांति आती है तो सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। संक्रांति के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है लेकिन कन्या संक्रांति पितर पक्ष में आ रही है तो पितर दोष से मुक्ति पाने का ये सुनहरी अवसर है। बंगाल और उड़ीसा साइड पर विश्वकर्मा पूजा का भी विधान है। कहते हैं जो व्यक्ति आज के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करता है उसका मंद पड़ा व्यवसाय भी सफलता के शिखर छूने लगता है। 

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कन्या संक्रांति पर फॉलो की जाती हैं ये परंपराएं, आप भी उठाएं लाभ
पवित्र जलाशयों में स्नान करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है। संभव न हो तो घर पर सूर्य उदय होने से पहले स्नान करें। फिर सूर्य देव को अर्घ्य दें।

कारीगर और मजदूरों को भगवान विश्वकर्मा की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इससे सारा साल उनके काम में बरकत बनी रहती है।

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इंजीनियर, यंत्र चलाने वालों, इंजन चलाने वाले, यंत्र बनाने वाले, तालों का निर्माण और मरम्मत करने वाला, इंजन-ड्राइवर के देव विश्वकर्मा गुरु हैं। उन्हें अपने गुरु की पूजा प्रेम भाव से करनी चाहिए। इससे उनके काम में प्रगति होती है और वो मनचाही सफलता प्राप्त करेंगे।

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मशीनों की पूजा करने के बाद उन्हें फूलों से सजाना चाहिए। धूप-दीप दिखाकर देसी घी का दीपक लगाएं। मान्यता है इससे मशीनें सुचारु रुप से काम करती हैं और सारा साल उन्हें रिपेयर आदि की आवशकता नहीं पड़ती। 

पूजा के बाद भगवान विश्वकर्मा को फलों और मिठाईयों का भोग चढ़ाया जाता है।

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Niyati Bhandari

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