Kanya Pujan Samagri List : कन्या पूजन से पहले जान लें ये A to Z सामग्री लिस्ट, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा

punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 03:48 PM (IST)

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Kanya Pujan Samagri List : चैत्र या शारदीय नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। अष्टमी और नवमी के दिन नौ कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। यदि आप इस पावन अवसर के लिए तैयारी कर रहे हैं, तो यहां कन्या पूजन की संपूर्ण A to Z सामग्री लिस्ट दी गई है ताकि आपकी पूजा में कोई कमी न रहे।

Kanya Pujan Samagri List

कन्या आमंत्रण एवं स्वागत सामग्री

कन्या पूजन की शुरुआत उनके स्वागत से होती है। इसके लिए आपको इन वस्तुओं की आवश्यकता होगी:
साफ जल (तांबे के लोटे में): कन्याओं के पैर धोने के लिए।
बड़ा परात या थाल: जिसमें कन्याएं पैर रखेंगी।
साफ तौलिया या रुमाल: पैर पोंछने के लिए।
आसन (कुशन या दरी): कन्याओं के बैठने के लिए।

 मुख्य पूजा सामग्री (थाली की सामग्री)

रोली या कुमकुम: माथे पर तिलक लगाने के लिए।
अक्षत (बिना टूटे चावल): तिलक पर लगाने के लिए।
मौली (कलावा): कलाई पर बांधने के लिए।
इत्र: खुशबू के लिए।
फूल और पुष्पमाला: देवी स्वरूप कन्याओं को अर्पित करने के लिए।
दीपक (घी का): आरती के लिए।
धूपबत्ती या अगरबत्ती।
कपूर: अंतिम आरती के लिए।

कन्या भोजन सामग्री
शास्त्रों के अनुसार कन्या पूजन में सात्विक भोजन का अत्यंत महत्व है। इसमें प्याज और लहसुन का प्रयोग वर्जित है।

सूजी (रवा): हलवा बनाने के लिए।
देसी घी: हलवा और पूड़ी के लिए।
चीनी: मीठे के लिए।
काले चने: इन्हें भिगोकर और उबालकर सूखा बनाया जाता है।
गेहूं का आटा: पूड़ियों के लिए।
मसाले: जीरा, सेंधा नमक (या सादा नमक), हल्दी, काली मिर्च और हरी मिर्च।
सूखे मेवे: काजू, बादाम और किशमिश (प्रसाद की सजावट के लिए)।

Kanya Pujan Samagri List

कन्या श्रृंगार एवं उपहार

लाल चुनरी: हर कन्या के लिए एक छोटी लाल चुनरी।
श्रृंगार का सामान: चूड़ियां, बिंदी, रबर बैंड, मेहंदी और छोटा शीशा।
फल: केला, सेब या मौसमी फल।
दक्षिणा (नकद राशि): अपनी श्रद्धा अनुसार।
उपहार: लंच बॉक्स, पेंसिल बॉक्स, खिलौने या स्टील के बर्तन (कटोरी/गिलास)।

Kanya Pujan Samagri List

 कन्या पूजन की विधि

शुद्धिकरण: सबसे पहले घर और स्वयं को शुद्ध करें।

चरण प्रक्षालन: कन्याओं के प्रवेश करते ही उनके पैर धोएं और उन्हें आसन पर बिठाएं।

तिलक और कलावा: सभी कन्याओं और एक लांगुरिया को तिलक लगाएं और कलाई पर मौली बांधें।

भोजन परोसें: सबसे पहले देवी को भोग लगाएं, फिर कन्याओं को प्रेमपूर्वक भोजन कराएं।

उपहार और दक्षिणा: भोजन के बाद उन्हें उपहार और फल दें।

आशीर्वाद लें: अंत में कन्याओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें।

कन्या पूजन के लिए 2 से 10 वर्ष की कन्याओं को बुलाना श्रेष्ठ माना जाता है। सभी कन्याओं को एक समान भाव से सम्मान दें।


 


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Content Editor

Prachi Sharma

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