Devshayani Ekadashi 2026: 25 जुलाई को है देवशयनी एकादशी, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और चातुर्मास के कड़े नियम
punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 01:11 AM (IST)
Devshayani Ekadashi 2026: सनातन शास्त्रों के अनुसार हर एकादशी का अपना एक अलग ही महत्व है लेकिन आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, आध्यात्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस वर्ष यह पावन तिथि 25 जुलाई 2026 को पड़ रही है। देवशयनी एकादशी के बाद श्री हरि चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा करने से सारे दुख, दर्द दूर हो जाते हैं।

Devshayani Ekadashi Shubh Muhurat देवशयनी एकादशी शुभ मुहूर्त
देवशयनी एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 9 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 25 जुलाई को दोपहर 11 बजकर 34 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
Devshayani Ekadashi Puja Vidhi देवशयनी एकादशी पूजा विधि
देवशयनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
उसके बाद घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और गंगा जल का छिड़काव करें।
फिर एक चौकी पर एक कपड़ा बिछाकर श्री हरि की प्रतिमा स्थापित करें।
अब भगवान विष्णु को अक्षत, चंदन, तुलसी दल और पीले रंग के फूल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद उनके मंत्रों का जाप करें।
अंत में आरती करके केसर से बनी मिठाई का भोग लगाएं।

भगवान विष्णु के मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
श्रीकृष्ण गोविन्द हरे मुरारे। हे नाथ नारायण वासुदेवाय।।
ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
ॐ विष्णवे नम:
ॐ हूं विष्णवे नम:
ॐ नमो नारायण। श्री मन नारायण नारायण हरि हरि।

चातुर्मास में न करें ये काम
चातुर्मास के दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक कार्य जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, और यज्ञोपवीत संस्कार नहीं करने चाहिए।
तामसिक चीजें जैसे- मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन न करें। यात्रा नहीं करनी चाहिए। किसी का अपमान न करें और बुरे विचारों और बातों से दूरी बनाकर रखें।
चातुर्मास में करें ये काम
चातुर्मास में सूर्योदय से पहले उठें और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। साथ ही हर रोज विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। अपनी क्षमतानुसार जरूरतमंदों या गरीबों को दान करें। व्रत, जप, तप, साधना, योग आदि का अभ्यास आध्यात्मिक उन्नति करवाता है। चातुर्मास के दौरान दिन में बस एक बार भोजन का सेवन करें। साथ ही अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें।
चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु के साथ-साथ शिव जी और माता पार्वती की पूजा करनी चाहिए। शिव परिवार की पूजा करने से जीवन में आने वाली हर परेशानी से छुटकारा मिलता है।

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