Kamakhya Temple Mystery: कामाख्या मंदिर का वो रहस्यमयी चमत्कार, जिसे देख विज्ञान भी है हैरान, यहां मूर्ति नहीं होती है अंग की पूजा
punjabkesari.in Saturday, Aug 01, 2026 - 02:35 PM (IST)
Kamakhya Temple Mystery: भारत में वैसे तो कई प्राचीन और चमत्कारी मंदिर हैं, लेकिन असम के गुवाहाटी से लगभग 8 किलोमीटर दूर स्थित कामाख्या देवी मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और असम के नीलांचल पर्वत पर समुद्र तल से करीब 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

मूर्ति नहीं, 'योनिरूप' में पूजी जाती हैं मां
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई प्रतिमा या मूर्ति स्थापित नहीं है। शास्त्रों के अनुसार, जब भगवान शिव देवी सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में भ्रमण कर रहे थे, तब इस स्थान पर देवी सती की योनि गिरी थी। यही कारण है कि यहां माता रानी की पूजा एक योनि के रूप में की जाती है। इन्हें रक्त की देवी के नाम से भी जाना जाता है।

जब लाल हो जाता है ब्रह्मपुत्र का पानी
सामाजिक मान्यताओं में जहां मासिक धर्म (Periods) को अपवित्र मानकर महिलाओं पर कई पाबंदियां लगाई जाती हैं, वहीं कामाख्या मंदिर में इसी अवस्था को दिव्य शक्ति के रूप में पूजा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, हर साल जून के महीने में तीन दिनों के लिए मां कामाख्या रजस्वला (Menstruating) होती हैं। इस दौरान मंदिर के पास बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी मां के रक्तस्राव से लाल हो जाता है, जो इस चमत्कार का साक्षात प्रमाण माना जाता है।

तीन दिनों तक बंद रहते हैं कपाट
महावारी के इन तीन दिनों के दौरान मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद कर दिए जाते हैं। पुजारियों का मानना है कि इन दिनों इस शक्तिपीठ की आध्यात्मिक शक्ति और अधिक बढ़ जाती है। यही वजह है कि देश के विभिन्न हिस्सों से तांत्रिक और साधक इन तीन दिनों में आस-पास की गुफाओं में रहकर कठिन साधना करते हैं।

भक्तों को मिलता है 'दिव्य प्रसाद'
चौथे दिन जब मंदिर के द्वार खुलते हैं, तो भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है। यहां आने वाले भक्तों को प्रसाद के रूप में लाल रंग का एक वस्त्र दिया जाता है। यह वही वस्त्र होता है जिसे माता रानी रजस्वला अवस्था के दौरान धारण करती हैं। माना जाता है कि जिसे भी इस वस्त्र का टुकड़ा मिल जाता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और विघ्न-बाधाएं दूर हो जाती हैं।

