Kalashtami: बुरी शक्तियों से बचना है तो कालाष्टमी पर इस विधि से करें बाबा काल भैरव की पूजा

punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 07:30 AM (IST)

Kalashtami september 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर हर माह मासिक कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। जो भगवान शिव के अवतार काल भैरव देव को समर्पित है। तंत्र शक्तियों पर विश्वास रखने वाले साधक विशेष रुप से बाबा काल भैरव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो जातक कालाष्टमी पर काल भैरव देव की पूजा करता है उसे काल, कष्ट, दुख और संकट छू भी नहीं सकते। उसके सुख और सौभाग्य में निरंतर वृद्धि होती रहती है।

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Method of worshiping Kalashtami कालाष्टमी पूजा विधि
प्रातः स्नान कर काले वस्त्र धारण करें और "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र से पूजा का संकल्प लें और सारा दिन मन ही मन में इस मंत्र का जाप करते रहें। भगवान भैरव की प्रतिमा/चित्र को मंदिर या घर के पवित्र स्थान पर स्थापित करें। यदि घर में नहीं कर सकते तो भैरव बाबा की पूजा मंदिर जाकर करें। बाबा को दूध, दही, शहद, गंगा जल अर्पित करें। चंदन का तिलक लगाएं। भैरव जी को सरसों का तेल, उड़द दाल, नारियल, जलेबी, इमरती, मालपुआ, मदिरा (प्रतीक रूप में) चढ़ाना शुभ माना गया है। भैरव जी के वाहन कुत्तों को रोटी या मिठाई खिलाना विशेष पुण्य देता है।

दीपक में सरसों का तेल या घी जलाकर आरती करें और इस मंत्र का जाप करें। मंत्र जाप करना संभव न हो तो भैरव अष्टक अथवा भैरव स्तोत्र का पाठ करें। कालाष्टमी की रात को भैरव चालीसा, भैरव कवच का पाठ करना अत्यंत फलदायी है।

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Kalashtami Mantra कालाष्टमी मंत्र- ॐ कालभैरवाय नमः

भैरव जी शिव के रुद्र रूप हैं जिन्हें "काशी के कोतवाल" कहा जाता है। इन्हें काल (समय) का स्वामी माना गया है। तंत्र साधना में भैरव को अत्यधिक महत्व दिया गया है क्योंकि वे त्वरित फल देने वाले देवता हैं। भक्त की रक्षा करना, बुरी शक्तियों को नष्ट करना और साधक को सिद्धि देना इनका मुख्य कार्य है। भैरव जी आठ रूपों में पूजे जाते हैं जिन्हें अष्ट भैरव कहा जाता है- असितांग, रुरु, चंड, क्रोध, उन्मत्त, कपाल, भीषण, संहार।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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