अगर आपके घर में भी होते हैं लड़ाई-झगड़े तो ये उपाए जरूर आजमाएं

12/13/2019 10:23:03 AM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
आज के समय में हर किसी के अंदर क्रोध की भावना होती ही है। ऐसे में वह इंसान अपने आस-पास का माहौल भी वैसा ही बना देता है, जैसा उसका मन होता है। इसके साथ ही वह कोई भी कार्य ठीक तरह से नहीं कर पाता है। गुस्से की भावना में इंसान छोटी-छोटी बातों को लड़ाई का रूप दे देता है और हर किसी के साथ झगड़ा कर बैठता है। वैसे तो पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर तकरार होना आम बात होती है, लेकिन अगर वहीं तकरार बड़े झगड़े का रूप ले ले तो बहुत मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। वास्तव में घरेलू तनाव होने से घर का माहौल बिगड़ता ही है, ऐसे में वहां रहने वाले लोगों के लिए तरक्की कर पाना भी असंभव हो जाता है। इसलिए आज हम आपको गृह क्लेश को दूर करने के कुछ आसान से उपाय बताने जा रहे हैं। 
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ज्योतिष शास्त्र
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में दूसरा भाव परिवार का भाव होता है। वहीं चौथा भाव सुख-शांति को दर्शाता है। जबकि सातवां भाव पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ा है। अगर कुंडली में ये भाव कमजोर हो अथवा इनके स्वामी ग्रह पीड़ित हों या इन भावों पर मंगल, शनि, राहु, केतु जैसे क्रूर ग्रह स्थित हो जाएं तो परिवार में क्लेश पैदा होने लगता है।

वास्तु दोष 
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दक्षिण-पूर्वी दिशा को आग्नेय कोण कहते हैं। यह स्थान अग्नि देव का स्थान माना जाता है इसलिए यहां घर की रसोई ही होनी चाहिए। वहीं वास्तु शास्त्र मानता है कि अगर यहां बेडरूम है तो पति-पत्नी के बीच झगड़े होना स्वाभिक बात होगी। अग्नि तत्व में विघटन आ जाने से परिवार में बहस, झगड़े आदि का माहौल बन जाता है जिससे रिश्ते टूट भी सकते हैं। 
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उपाय
कुंडली के दूसरे भाव और इस भाव के स्वामी को बलवान करें। इसके लिए सुबह-शाम अपने घर के मंदिर में दूप दान अवश्य करें। 

अगर घर में सुख-शांति नहीं है तो चौथे भाव और चौथे भाव के स्वामी को शक्तिशाली बनाएं। चावल, चांदी और दूध बहते पानी में बहाएं अथवा खीर या दूध मां समान महिलाओं को खिलाएं।

भाई-भाई के बीच मतेभेद है तो कुंडली के तीसरे और ग्यारहवें भाव की मजबूती के उपाय करें।
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अगर पति-पत्नी के बीच क्लेश है तो कुंडली के सप्तम भाव और उसके स्वामी को मजबूत करें।

घर के वास्तु दोष को दूर करें और इसके लिए अपने घर की साफ-सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें। इसके साथ ही पितर पक्ष पर पित्तरों का तर्पण अवश्य कराएं।


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