Janaki Jayanti Vrat Katha : इस पावन कथा से मिलेगा सीता माता का आशीर्वाद, जानकी जयंती पर जरूर पढ़ें

punjabkesari.in Sunday, Feb 08, 2026 - 03:59 PM (IST)

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Janaki Jayanti Vrat Katha :फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जानकी जयंती मनाई जाती है। इस दिन माता सीता और भगवान श्रीराम की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इसे सीता अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस पावन तिथि पर व्रत रखने, पूजा करने और व्रत कथा सुनने-पढ़ने से घर में सुख, शांति और सौभाग्य बना रहता है।

Janaki Jayanti Vrat Katha

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मिथिला के राजा जनक संतानहीन थे और अपनी प्रजा के कल्याण के लिए सदैव चिंतित रहते थे। एक समय उनके राज्य में लंबे समय तक वर्षा नहीं हुई, जिससे अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई। चारों ओर संकट बढ़ने लगा। तब राजा जनक ने ऋषि-मुनियों और पुरोहितों से यज्ञ करवाया और स्वयं भी समस्या के समाधान के लिए खेत जोतने का निर्णय लिया।

एक दिन जब राजा स्वयं हल लेकर खेत जोत रहे थे, तभी अचानक उनका हल जमीन में एक स्थान पर अटक गया। काफी प्रयास के बाद भी वह आगे नहीं बढ़ पाया। जब उस स्थान की मिट्टी हटाई गई, तो वहां से एक दिव्य कन्या प्रकट हुई। उसी क्षण आकाश से वर्षा होने लगी और सूखा समाप्त हो गया। राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा और उसे अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया।

Janaki Jayanti Vrat Katha

माता सीता के आगमन के बाद मिथिला में फिर से खुशहाली लौट आई। राज्य में सुख-समृद्धि फैल गई और लोग शांतिपूर्वक जीवन जीने लगे। शास्त्रों के अनुसार, जिस दिन माता सीता पृथ्वी से प्रकट हुई थीं, वह फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी। तभी से इस दिन को माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

आज भी भक्तजन इस दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ जानकी जयंती मनाते हैं और माता सीता की कृपा प्राप्त करने के लिए व्रत, पूजा और कथा का पाठ करते हैं।

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Content Editor

Prachi Sharma

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