युद्ध से पहले जवान लेने आते हैं यहां मां काली का आशीर्वाद

11/21/2019 2:31:16 PM

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
हमारे भारत देश में ऐसे बहुत से चमत्कारी मंदिर  स्थापित हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे। ऐसी ही एक जगह है जिसे देवभूनम के नाम से जाना जाता है और वे स्थान उत्तराखंड है। यहां बद्रीनाथ, केदारनाथ, जागेश्वर धाम जैसे शक्तिपीठ, तीर्थस्थल और ज्योतिर्लिंग हैं। इन सबके बारे में तो सब जानते हैं, लेकिन आज हम आपको इसी स्थान से जुड़े एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने आप में ही रहस्यमय है। 
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कहते हैं कि इस जगह पर माता काली स्वंय प्रकट हुई थी और इसे हाट कालिका के नाम से जाना जाता है। माता का दरबार पेड़ों से चारों तरफ से घुरा हुआ है और ये पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में स्थित है। स्कंदपुराण के मानस खंड में यहां स्थित देवी का वर्णन मिलता है। मान्यता के अनुसार, कालिका का रात में डोला चलता है। इस डोले के साथ कालिका के गण, आंण व बांण की सेना भी चलती है। कहा जाता है कि अगर कोई इस डोले को छू ले तो उसे दिव्य वरदान की प्राप्ति हो जाती है।
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मां काली करती है विश्राम
इस स्थान के बारे में कहा जाता है कि यहां पर मां काली विश्राम करती है और यही कारण है कि शक्तिपीठ के पास महाकाली का बिस्तर भी लगाया जाता है। स्थानीय लोगों व पूजारियों का कहना है कि सुबह में जब वे लोग पूजा के लिए आते हैं तो बिस्तर पर सिलवटें पड़ी होती हैं, जो संकेत देती है कि यहां पर किसी ने विश्राम किया था। बताया जाता है कि जो भी महाकाली के चरणों में श्रद्धापुष्प अर्पित करता है वह रोग, शोक और दरिद्रता से दूर हो जाता है।
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महाकाली इंडियर आर्मी की कुमाऊ रेजिमेंट की आरध्य हैं। बताया जाता है कि इस रेजिमेंट के जवान युद्ध या मिशन पर जाते हैं तो इस मंदिर का दर्शन जरूर करते हैं। यही कारण है कि इस मंदिर के धर्मशालाओं में किसी न किसी आर्मी अफसर का नाम जरूर मिल जाता हैं। सुबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में हुई थी महाकाली की मूर्ति की स्थापना बताया जाता है कि 1971 में पाकिस्तान के साथ छिड़ी जंग के बाद कुमाऊ रेजीमेंट ने सुबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में महाकाली की मूर्ति की स्थापना हुई थी। 


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