मेन गेट पर बप्पा की फोटो या मूर्ति लगाने से पहले वास्तु शास्त्र के ये गोल्डन रूल्स जरूर पढ़ें
punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 02:54 PM (IST)
Ganesha idol Vastu for home entrance : हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है, जो सभी बाधाओं को दूर कर जीवन में शुभता लाते हैं। यही कारण है कि अधिकांश लोग अपने घर के मुख्य द्वार पर गणपति की प्रतिमा या तस्वीर लगाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर इसे वास्तु के नियमों के अनुसार न लगाया जाए, तो यह लाभ के बजाय परेशानी का कारण बन सकता है। तो आइए जानते हैं वास्तु शास्त्र के वे गोल्डन रूल्स के बारे में, जिन्हें मुख्य द्वार पर बप्पा की मूर्ति लगाने से पहले आपको जरूर जान लेना चाहिए।

सूंड की दिशा का रखें विशेष ध्यान
वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार के लिए बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा सबसे शुभ मानी जाती है। इन्हें वाममुखी गणेश कहते हैं। माना जाता है कि ऐसी प्रतिमा घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती है। दाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाले गणेश जी के नियम बहुत कठिन होते हैं, जिन्हें आमतौर पर मंदिरों में ही स्थापित किया जाता है।
दृष्टि गणेश का नियम (पीठ का छिपा होना)
यह सबसे महत्वपूर्ण नियम है। शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी की पीठ में 'दरिद्रता' का वास माना जाता है। यदि आप मुख्य द्वार के बाहर गणेश जी लगाते हैं, तो उनकी पीठ घर की तरफ हो जाती है, जो वास्तु दोष पैदा कर सकता है। मुख्य द्वार पर हमेशा दो प्रतिमाएं लगाएं- एक बाहर की ओर और ठीक उसी जगह दीवार के दूसरी तरफ एक अंदर की ओर। इस तरह गणेश जी की पीठ आपस में मिल जाएगी और घर के अंदर उनका मुख होगा, जिससे दरिद्रता प्रवेश नहीं कर पाएगी।

प्रतिमा का रंग और स्वरूप
सफेद रंग
यदि आप घर में शांति और सुख चाहते हैं, तो सफेद रंग के गणपति की प्रतिमा लगाएं।
सिंदूरी रंग
यदि आप जीवन में प्रगति और आत्मविश्वास चाहते हैं, तो सिंदूरी या लाल रंग के गणेश जी लगाना श्रेष्ठ है।
बैठे हुए गणेश
मुख्य द्वार के लिए हमेशा बैठे हुए गणेश जी की प्रतिमा चुनें। यह घर में स्थिरता और लक्ष्मी का वास सुनिश्चित करता है।
सही ऊंचाई और स्थान
गणपति की प्रतिमा को जमीन से बिल्कुल सटाकर न रखें। इसे हमेशा आंखों के स्तर या उससे थोड़ा ऊपर किसी चौकी या ऊंचे स्थान पर स्थापित करें। साथ ही, प्रवेश द्वार के ऊपर बिल्कुल बीचों-बीच प्रतिमा लगाना सबसे अच्छा माना जाता है।
आसपास की सफाई और पवित्रता
मुख्य द्वार जहां गणेश जी विराजित हों, वहां कभी भी गंदगी, कूड़ादान या पुराने जूते-चप्पल न रखें। उस स्थान को हमेशा साफ और प्रकाशमान रखें। अंधेरे में भगवान की प्रतिमा रखना वास्तु दोष माना जाता है।

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