Ganesh Chaturthi Chandra Darshan: आज गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन है वर्जित, भूलकर भी न देखें चांद, लग सकते हैं ये गंभीर लांछन
punjabkesari.in Monday, Sep 14, 2026 - 03:37 PM (IST)
Ganesh Chaturthi Chandra Darshan:भाद्रपद शुक्ल गणेश चतुर्थी का पावन दिवस प्रथम पूज्य एवं अग्र पूजा के अधिकारी भगवान श्री गणेश जी के स्वागत का प्रतीक है। इस शुभ अवसर पर भक्त अपनी श्रद्धा, भक्ति और सामर्थ्य के अनुसार विघ्नहर्ता गणपति जी को अपने घर लाते हैं और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। यद्यपि गणपति स्थापना का उत्सव पारंपरिक रूप से महाराष्ट्र से जुड़ा हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह गैर-महाराष्ट्रीयन परिवारों में भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा है। परिवार में एक खास मेहमान की तरह 10 दिनों तक गणेश जी की विशेष खातिरदारी की जाती है, जिसके लिए पूजा घर को सजाया जाता है तथा भांति-भांति के मोदक और पकवान तैयार किए जाते हैं।

'गणपति बप्पा मोरया' के भक्तिमय जयघोष, आरती, भजनों के संगीत और मोदक की खुशबू के साथ पूरा वातावरण बप्पा के आगमन के रंग में रंग जाता है। लेकिन इस पावन पर्व पर एक विशेष धार्मिक सावधानी बरतनी अत्यंत आवश्यक मानी गई है। गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करना वर्जित होता है, क्योंकि इस दिन चांद देखने से व्यक्ति पर झूठे व मिथ्या आरोप लगने का संशय बना रहता है।

चतुर्थी पर चांद देखने के घातक दुष्परिणाम
धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करने पर व्यक्ति को निम्नलिखित दुष्परिणामों और लांछनों का सामना करना पड़ सकता है:

चोरी का झूठा इल्जाम: व्यक्ति पर बिना किसी वजह के चोरी का आरोप लग सकता है।
चारित्रिक लांछन: विपरीत लिंग द्वारा चरित्र पर लांछन या किसी की पत्नी को छेड़ने का इल्जाम लगाया जा सकता है।
संदेह और अविश्वास: समाज या अपनों के बीच व्यक्ति के प्रति अकारण संशय उत्पन्न हो सकता है।
कथनों का गलत अर्थ: आपके द्वारा कही गई सामान्य बातों का भी गलत मतलब निकाला जा सकता है।
कानूनी अड़चनें: व्यक्ति झूठे कोर्ट-कचहरी के मामलों में फंस सकता है।
सामाजिक छवि को नुकसान: व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा और सामाजिक छवि को गंभीर ठेस पहुंच सकती है।

