Dussehra 2026: 20 या 21 अक्टूबर? जानिए विजयादशमी की सटीक तारीख, रावण दहन का प्रदोष काल और शस्त्र पूजन का विजय मुहूर्त
punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 04:18 PM (IST)
Vijayadashami 2026: आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या सर्वत्र विजय देने वाली विजयादशमी का त्योहार बड़े धूम-धाम से पूरे देश में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण तथा देवी दुर्गा ने महिषासुर का वध करके धर्म और सत्य की रक्षा की थी। दुर्गा पूजा के उपरांत दसवें दिन मनाई जाने वाली विजयादशमी अभिमान, अत्याचार एवं बुराई पर सत्य, धर्म और अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

दशहरा की सही तारीख
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर 21 अक्टूबर को दशहरा मनाने की बात सामने आती है, लेकिन विजयादशमी पर विजय मुहूर्त और प्रदोष काल का भी विशेष महत्व है। ऐसे में 20 अक्टूबर की शाम को रावण दहन किया जा सकता है।
विजयादशमी का शुभ मुहूर्त
20 अक्टूबर को दशहरा पर विजय मुहूर्त को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस समय पूजा-पाठ और शुभ कार्य करना फलदायी माना जाता है।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 से शाम 3:30 बजे तक
रावण दहन का शुभ समय
दशहरे पर प्रदोष काल में रावण दहन करना शुभ माना जाता है। 20 अक्टूबर को शाम 5:47 बजे से प्रदोष काल शुरू होगा। स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार रावण दहन का समय तय किया जा सकता है। निशिता मुहूर्त 20 अक्टूबर की रात 11:41 बजे से 21 अक्टूबर की रात 12:31 बजे तक बताया गया है।

दशहरा पर बनेगा शुभ योग
इस वर्ष दशहरा पर एक साथ कई तरह के शुभ योगों का निर्माण होगा। दशहरा पर श्रवण नक्षत्र का संयोग बनेगा। पंचांग के अनुसार श्रवण नक्षत्र 19 अक्तूबर को दोपहर 03 बजकर 38 मिनट से आरंभ होकर 20 अक्तूबर को शाम 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।
दशहरा का महत्व
हिंदू धर्म में विजयादशमी के त्योहार का विशेष महत्व होता है। विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन रावण के दस सिरों के साथ व्यक्ति के अंदर छिपी 10 तरह की नकारात्मक गुणों का प्रतीक माना जाता है। दशहरा पर रावण के दहन के साथ नया कार्य शुरू करने, व्यापार आरंभ करने के साथ शस्त्र पूजन को शुभ माना जाता है। इसके अलावा दशहरे पर दस दिनों तक चले युद्ध में मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इस कारण शस्त्र पूजा, दुर्गा पूजा, राम पूजन और शमी पूजन का इस दिन विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन आरंभ किया गया कोई भी कार्य सफल होता है। इसी दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कर दुर्गोत्सव का समापन भी होता है। साथ ही चंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन का विशेष महत्व है।

दशहरे पर कैसे करें पूजा
विजयादशमी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान श्रीराम तथा मां दुर्गा की पूजा करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार शमी पूजन, अपराजिता पूजन और शस्त्र पूजन भी करते हैं। इस दिन नए काम की शुरुआत करना भी शुभ माना जाता है। नवरात्रि का व्रत रखने वाले भक्त पूजा के बाद अपनी परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं। दशहरे का संदेश यही है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयां आएं, सत्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
पंचांगीय तिथियों के विश्लेषण और शास्त्रीय विधान के अनुसार साल 2026 में विजयादशमी का मुख्य पर्व, शस्त्र पूजन, विजय मुहूर्त का अनुष्ठान और रावण दहन 20 अक्टूबर को ही मनाया जाना उचित है। 20 अक्टूबर की तिथि में अपराह्न पूजन और प्रदोष काल दोनों का पूर्ण सहयोग मिल रहा है, जो धर्मशास्त्रों के अनुकूल है।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
संपर्क सूत्र - 9005804317, 7054594317

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