Shardiya Navratri 2026 Bhog List: शारदीय नवरात्रि में मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक, हर दिन के विशेष प्रसाद की पूरी जानकारी, जानें किस भोग से प्रसन्न होंगी मां भगवती
punjabkesari.in Wednesday, Oct 07, 2026 - 11:23 AM (IST)
Shardiya Navratri 2026 Bhog List: शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना पूरे विधि-विधान और अपार श्रद्धा के साथ की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा के दौरान देवी भगवती को उनकी पसंद के अनुसार भोग अर्पित करने से भक्तों पर माता रानी की विशेष कृपा बनी रहती है। कई श्रद्धालु घटस्थापना के पहले दिन से ही नौ दिनों तक माता के लिए विशेष फलाहारी और पारंपरिक पकवान तैयार करते हैं। जहां कुछ भक्त मां को फल और मखाने अर्पित करते हैं, वहीं कई घरों में हलवा, खीर और मालपुआ जैसे स्वादिष्ट प्रसाद बनाए जाते हैं। इसके अलावा अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ अर्पित किए जाने वाले भोग का अपना विशेष धार्मिक महत्व है। यदि आप भी इस नवरात्रि मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए दिन के अनुसार भोग तैयार करना चाहते हैं, तो आइए जानते हैं नवरात्रि की विशेष भोग सूची:
Shardiya Navratri Day Wise Bhog List शारदीय नवरात्रि दिन वार भोग सूची
पहला दिन मां शैलपुत्री: प्रथम नवरात्रे में मां दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री शैलपुत्री की पूजा करने से मूलाधार चक्र जागृत हो जाता है और साधकों को सभी प्रकार की सिद्धियां स्वत: ही प्राप्त हो जाती हैं। मां का वाहन वृषभ है तथा इन्हें गाय का घी अथवा उससे बने पदार्थों का भोग लगाया जाता है।
दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी: दूसरे नवरात्र में मां के ब्रह्मचारिणी एवं तपश्चारिणी रूप को पूजा जाता है। जो साधक मां के इस रूप की पूजा करते हैं उन्हें तप, त्याग, वैराग्य, संयम और सदाचार की प्राप्ति होती है और जीवन में वे जिस बात का संकल्प कर लेते हैं उसे पूरा करके ही रहते हैं। मां को शक्कर का भोग प्रिय है।
तीसरा दिन मां चन्द्रघंटा: मां के इस रूप में मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चन्द्र बना होने के कारण इनका नाम चन्द्रघंटा पड़ा तथा तीसरे नवरात्रे में मां के इसी रूप की पूजा की जाती है तथा मां की कृपा से साधक को संसार के सभी कष्टों से छुटकारा मिल जाता है। शेर पर सवारी करने वाली माता को दूध का भोग प्रिय है।
चौथा दिन मां कूष्मांडा: अपने उदर से ब्रह्मंड को उत्पन्न करने वाली मां कूष्मांडा की पूजा चौथे नवरात्रे में करने का विधान है। इनकी आराधना करने वाले भक्तों के सभी प्रकार के रोग एवं कष्ट मिट जाते हैं तथा साधक को मां की भक्ति के साथ ही आयु, यश और बल की प्राप्ति भी सहज ही हो जाती है। मां को भोग में मालपूआ अति प्रिय है।
पांचवां दिन मां स्कंदमाता: पंचम नवरात्रे में आदिशक्ति मां दुर्गा की स्कंदमाता के रूप में पूजा होती है। कुमार कार्तिकेय की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनकी पूजा करने वाले साधक संसार के सभी सुखों को भोगते हुए अंत में मोक्ष पद को प्राप्त होते हैं। उनके जीवन में किसी भी प्रकार की वस्तु का कोई अभाव कभी नहीं रहता। इन्हें पद्मासनादेवी भी कहते हैं। मां का वाहन सिंह है और इन्हें केले का भोग अति प्रिय है।
छठा दिन मां कात्यायनी: महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति मां दुर्गा ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और उनका कात्यायनी नाम पड़ा। छठे नवरात्रे में मां के इसी रूप की पूजा की जाती है। मां की कृपा से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष आदि चारों फलों की जहां प्राप्ति होती है वहीं वह आलौकिक तेज से अलंकृत होकर हर प्रकार के भय, शोक एवं संतापों से मुक्त होकर खुशहाल जीवन व्यतीत करता है। मां को शहद अति प्रिय है।
सातवां दिन मां कालरात्रि: सभी राक्षसों के लिए कालरूप बनकर आई मां दुर्गा के इस रूप की पूजा सातवें नवरात्रे में की जाती है। मां के स्मरण मात्र से ही सभी प्रकार के भूत, पिशाच एवं भय समाप्त हो जाते हैं। मां की कृपा से भानूचक्र जागृत होता है मां को गुड़ का भोग अति प्रिय है।
आठवां दिन मां महागौरी: आदिशक्ति मां दुर्गा के महागौरी रूप की पूजा आठवें नवरात्रे में की जाती है। मां ने काली रूप में आने के पश्चात घोर तपस्या की और पुन: गौर वर्ण पाया और महागौरी कहलाई। मां का वाहन बैल है तथा मां को हलवे का भोग लगाया जाता है तभी अष्टमी को पूजन करके मां को हलवे पूरी का भोग लगाया जाता है। मां की कृपा से साधक के सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसे आर्थिक लाभ भी मिलता है।
नौवां दिन मां सिद्धिदात्री: नौंवें नवरात्रे में मां के इस रूप की पूजा एवं आराधना की जाती है, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है मां का यह रूप साधक को सभी प्रकार की ऋद्धियां एवं सिद्धियां प्रदान करने वाला है। जिस पर मां की कृपा हो जाती है उसके लिए जीवन में कुछ भी पाना असंभव नहीं रहता। मां को खीर अति प्रिय है अत: मां को खीर का भोग लगाना चाहिए।
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Content Writer
Niyati Bhandari