Dhumavati Jayanti 2021: देवी धूमावती की आराधना से दूर होते हैं सारे अभाव व संकट

2021-06-18T14:57:06.12

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
प्रत्येक वर्ष जेठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां धूमावती का प्राकट्य उत्सव मनाया जाता है। देसी कैलेंडर के अनुसार इस वाक्य पर आज जाने 18 जून दिन शुक्रवार को मनाया जा रहा है। मां धूमावती की पूजा से जुड़ी कई बातें हम आपको बता चुके हैं आइए आप जानते हैं शास्त्रों में वर्णित मा धूमावती की खास विशेषताएं।

धार्मिक ग्रंथों व प्रवृत्ति के अनुसार 10 महाविद्याओं के तीन समूह हैं। पहला सौम्य कोटि जिनमें त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, मातंगी कमल शामिल हैं।) दूसरा उग्र कोटि जिनमें (काली, छिन्नमस्ता, धूमावती, बगलामुखी, शामिल हैं।) और तीसरा सौम्य-उग्र कोटि (तारा और त्रिपुर भैरवी)।

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार माता धूमावती की उग्र साधना की जाती है । खास तौर पर अघोरपंथ और तंत्रमार्ग के लोग इनकी साधना करके सिद्धियां प्राप्त करते हैं। देवी धूमावती की पूजा के लिए चातुर्मास का माह प्रमुख माना जाता है।

शास्त्र के अनुसार मां धूमावती का कोई स्वामी नहीं है इसलिए इन्हें विधवा माना जाता है। देवी धूमावती महाशक्ति स्वयं नियंत्रिका कहलाती है।

ऋग्वेद में रात्रि सूक्त में देवी धूमावती को सूत्रा कहा गया है जिसका अर्थात ये देवी सुख पूर्वक तारने के योग्य हैं।

इन्हें कलहप्रिय भी कहा जाता है इनका मुख्य अस्त्र सूप जिसमें यह समस्त विश्व को समेटकर महाप्रलय करती हैं। तो वहीं इन्हें अभाव और संकट को दूर करने वाली माता भी कहा जाता है।

ज्योतिष वासियों के अनुसार देवी धूमावती की साधना के प्रभाव स्वरूप सभी रोग अरिष्ट और शत्रुओं का नाश होता है।

 


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Content Writer

Jyoti

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