Dhanu Sankranti 2025: धनु संक्रांति कब है ? जानें शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव की कृपा पाने का तरीका
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 12:00 PM (IST)
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Dhanu Sankranti 2025: धनु संक्रांति हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सूर्य के राशि परिवर्तन के कारण मनाया जाता है। इस दिन सूर्यदेव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रांति पौष मास की शुरुआत का भी प्रतीक है और इसके साथ ही खरमास या मलमास
आरंभ हो जाता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्यों को वर्जित माना जाता है।
धनु संक्रांति की तिथि और मुहूर्त
धनु संक्रांति तिथि- मंगलवार, 16 दिसंबर 2025
संक्रांति का क्षण (सूर्य का धनु राशि में प्रवेश)- 16 दिसंबर 2025 को सुबह 04:27 बजे
पुण्य काल- सुबह 07:07 बजे से दोपहर 12:17 बजे तक
पुण्य काल की अवधि- 05 घंटे 10 मिनट
महा पुण्य काल- सुबह 07:07 बजे से सुबह 08:50 बजे तक
धनु संक्रांति का महत्व
धनु संक्रांति का सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस दिन सूर्य अपने मित्र गुरु की राशि धनु में प्रवेश करते हैं। गुरु को ज्ञान, धर्म और अध्यात्म का कारक ग्रह माना जाता है, इसलिए इस मास में पूजा-पाठ, जप-तप और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है।
धनु संक्रांति के साथ ही खरमास शुरू हो जाता है, जो मकर संक्रांति तक चलता है। खरमास में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश और नए व्यवसाय की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
यह दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए दान का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
इस पूरे मास में भगवान सूर्य के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा और भक्ति पर जोर दिया जाता है।
सूर्यदेव की पूजा विधि
धनु संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी में स्नान करें। यदि यह संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर सूर्य देव की पूजा और व्रत का संकल्प लें।
एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें लाल चंदन, लाल फूल और अक्षत मिलाएं। सूर्योदय के समय, सूर्य की ओर मुख करके खड़े हों। जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करें: ॐ घृणिं सूर्याय नमः
पूजा समाप्त होने के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान अवश्य करें। इस दिन गुड़, तिल, कंबल, ऊनी वस्त्र, घी, चावल और अनाज का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। गरीबों, साधुओं और ब्राह्मणों को भोजन कराना या दान देना पुण्यकारी होता है।
