Rang Panchami 2026: 8 मार्च को देवी-देवता धरती पर आकर खेलेंगे होली, ये है पूजा का शुभ मुहूर्त

punjabkesari.in Friday, Mar 06, 2026 - 08:37 AM (IST)

Rang Panchami 2026: रंगों के पर्व होली के पांच दिन बाद मनाया जाने वाला रंग पंचमी का त्योहार विशेष धार्मिक महत्व रखता है। इसे देव होली, श्री होली या देवताओं की होली भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी-देवता स्वयं धरती पर आकर भक्तों के साथ होली खेलते हैं। यही वजह है कि इस दिन अबीर-गुलाल उड़ाने की परंपरा निभाई जाती है। वर्ष 2026 में रंग पंचमी कब मनाई जाएगी और इसका शुभ मुहूर्त क्या है, आइए जानते हैं विस्तार से।

Rang Panchami

Rang Panchami 2026 date and auspicious time रंग पंचमी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार रंग पंचमी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में रंग पंचमी 8 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी।

Rang Panchami

पंचमी तिथि प्रारंभ: 7 मार्च 2026, शाम 07:17 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 8 मार्च 2026, रात 09:10 बजे तक
उदयातिथि के अनुसार 8 मार्च को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।

Rang Panchami

Rang Panchami 2026 Puja Vidhi रंग पंचमी पूजा विधि
रंग पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की विशेष पूजा की जाती है। पूजा विधि इस प्रकार है:

स्नान और संकल्प
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।

स्थापना
एक साफ चौकी पर गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें। उस पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और लक्ष्मी-नारायण या राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

अभिषेक
भगवान को जल एवं पंचामृत से स्नान कराएं।

पूजन सामग्री अर्पित करें
अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, पुष्प और फल अर्पित करें।

भोग लगाएं
भगवान को गुड़-चना, मिश्री या खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

रंग अर्पण
राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण को गुलाल और अबीर अर्पित करें। मान्यता है कि इससे जीवन में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।

मंत्र जाप और आरती
कृष्ण मंत्रों का जाप करें और अंत में घी का दीपक जलाकर आरती करें। सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें।

Rang Panchami

रंग पंचमी का धार्मिक महत्व
रंग पंचमी को देवताओं को समर्पित पर्व माना जाता है। जहां होली के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, वहीं इस दिन रंगों को हवा में उड़ाने की परंपरा है। मान्यता है कि हवा में उड़ता अबीर-गुलाल देवताओं को आकर्षित करता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व नकारात्मकता को दूर कर सात्विकता और आनंद का प्रतीक माना जाता है।

ब्रज क्षेत्र और मध्य प्रदेश में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है। यहां इसे राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम उत्सव के रूप में देखा जाता है।

 

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Content Writer

Niyati Bhandari

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