Dhanteras 2026 & Pradosh Vrat: वर्ष 2026 की धनतेरस है बेहद खास, प्रदोष व्रत के साथ बन रहा महाअद्भुत संयोग, नोट कर लें शुक्र प्रदोष का शुभ मुहूर्त
punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 09:26 AM (IST)
Dhanteras 2026: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में इस बार एक अत्यंत दुर्लभ और फलदायी संयोग बनने जा रहा है। साल 2026 में नवंबर महीने का पहला प्रदोष व्रत धनतेरस के पावन पर्व के दिन पड़ रहा है। शुक्रवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक दृष्टिकोण से इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और धनपति कुबेर की संयुक्त पूजा का विशेष विधान रहेगा।

Dhanteras 2026 & Pradosh Vrat Alignment: नवंबर 2026 का पहला प्रदोष व्रत धनतेरस के दिन रखा जाएगा। जानें, कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की सही तारीख, प्रदोष काल पूजा का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण विधि।
Dhanteras 2026 & Pradosh Vrat Tithi Details कब शुरू होगी त्रयोदशी तिथि?
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10:30 बजे प्रारंभ होगी। इस तिथि का समापन 7 नवंबर 2026 को सुबह 10:47 बजे होगा। चूंकि प्रदोष काल की पूजा का समय 6 नवंबर को ही प्राप्त हो रहा है, इसलिए शुक्र प्रदोष का व्रत 6 नवंबर 2026 को ही रखा जाएगा।
Shukra Pradosh Vrat Shubh Muhurat क्र प्रदोष व्रत पूजा के लिए शुभ मुहूर्त
प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:52 बजे से सुबह 05:44 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:43 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
निशिता काल मुहूर्त: रात 11:39 बजे से मध्यरात्रि 12:31 बजे तक
एक ही दिन भगवान शिव और लक्ष्मी-कुबेर की कृपा
प्रदोष व्रत सीधे तौर पर महादेव की भक्ति का प्रतीक है। इस बार धनतेरस के साथ इसका मिलन होने से एक ही दिन भगवान भोलेनाथ, माता पार्वती, मां लक्ष्मी, श्री गणेश और कुबेर देव का आशीर्वाद प्राप्त करने का अद्भुत अवसर बन रहा है। मान्यता है कि प्रदोष काल में शिव-पार्वती का पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।
Shukra Pradosh Vrat Puja Vidhi प्रदोष व्रत पूजा विधि
सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके भगवान शिव के प्रिय दिन पर व्रत व पूजा करनी चाहिए। इसके बाद सूर्यास्त के समय एक बार और स्नान करके भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें। फिर भक्ति भाव के साथ प्रदोष व्रत की कथा सुनें या पढ़ें। मान्यता है शिव पूजा के दौरान ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जप करने से मानसिक तनाव कम होता है और मन को शांति मिलती है।
सूर्यास्त के 15 मिनट पहले स्नान कर धुले हुए सफ़ेद वस्त्र पहनकर शिवजी को शुद्ध जल से फिर पंचामृत से स्नान कराएं, पुन: शुद्ध जल से स्नान कराकर, वस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, अक्षत, इत्र, अबीर-गुलाल अर्पित करें। मंदार, कमल, कनेर, धतूरा, गुलाब के फूल व बेलपत्र चढ़ाएं, इसके बाद धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल व दक्षिणा चढ़ाकर आरती के बाद पुष्पांजलि समर्पित करें।
शिव प्रार्थना मंत्र-
‘भवाय भवनाशाय महादेवाय धीमते।
रुद्राय नीलकण्ठाय शर्वाय शशिमौलिने।।
उग्रायोग्राघ नाशाय भीमाय भयहारिणे।
ईशानाय नमस्तुभ्यं पशूनां पतये नम:।।
पूजन के बाद रुद्राक्ष की माला से 108 बार ॐ नमः शिवाय का जप करें।
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