Bhadli Navami 2026: चातुर्मास की 'बंदी' से पहले अबूझ मुहूर्त का महा-संयोग, 22 जुलाई को बिना पंचांग देखे निपटायें सारे मांगलिक काम
punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 03:15 PM (IST)
Bhadli Navami 2026: सनातन परंपरा में भडली नवमी का विशेष महत्व है। इसे भहुली नवमी या भहरिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह शुभ तिथि 22 जुलाई, बुधवार को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन साल के उन गिने-चुने दिनों में से एक है जिसे 'अबूझ मुहूर्त' का दर्जा प्राप्त है।

क्या होता है 'अबूझ मुहूर्त'?
अबूझ मुहूर्त का अर्थ है एक ऐसा अत्यंत शुभ समय, जिसमें किसी भी मांगलिक कार्य को करने के लिए अलग से पंडित जी से मुहूर्त निकलवाने या पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। भडली नवमी के दिन विवाह, सगाई, मुंडन, तिलक और गृह प्रवेश जैसे संस्कार बिना किसी संकोच के संपन्न किए जा सकते हैं।
भडली नवमी का अबूझ मुहूर्त 22 जुलाई को है। इस रोज पंचांग का विचार किए बिना कोई भी शुभ काम किया जा सकता है। 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के उपरांत सभी मांगलिक कार्यों पर 4 महीनों के लिए विराम लग जाएगा। भडली नवमी के शुभ दिन पर आप बिना कोई भी मुहूर्त देखे शुभ एवं मांगलिक कार्य कर सकते हैं। इस दिन भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा का विधान है। बहुत सारे स्थानों पर इस दिन व्रत-उपवास भी रखा जाता है।
सुख-सौभाग्य की प्राप्ति के लिए भडली नवमी पर करें ये काम
भडली नवमी पर ही गुप्त नवरात्रि का विश्राम होता है, ऐसे में 10 महाविद्या की पूजा, हवन करना और कंजक पूजा का विशेष महत्व होता है।
भगवान लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने के बाद कथा पढ़ें या सुनें। अंत में आरती करें।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
शिवालय जाकर शिव-पार्वती की पूजा करें।
भडली नवमी पूजा विधि
शास्त्रों के अनुसार इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा और कथा की जाती है। भडली नवमी पर साधक को स्नान करके धुले कपड़े पहनकर मौन रहकर पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान भगवान लक्ष्मी-नारायण को पीले फूल, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाना चाहिए। पूजा में बिल्व पत्र, हल्दी, कुमकुम या केसर से रंगे हुए चावल, पिस्ता, बादाम, काजू, लौंग, इलाइची, गुलाब या मोगरे का फूल, किशमिश, सिक्का आदि का प्रयोग करना चाहिए। पूजा के बाद प्रयोग हुई सामग्री को किसी ब्राह्मण या मंदिर में दान कर देना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार भडली नवमी के दिन इंद्राणी ने व्रत-पूजन करके देवराज इंद्र को प्राप्त किया था। भडली नवमी पर विवाह, आभूषणों की खरीदारी, वाहन, भवन और भूमि आदि भी खरीदना शुभ माना गया है। भड़ली नवमी के दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास लग जाता है। जिसका अर्थ है कि आने वाले 4 महीनों तक विवाह या अन्य शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकते हैं।

