Chinnamasta Jayanti: मां छिन्नमस्तिका की कृपा पाने का महापर्व, जानें पूजा विधि और तांत्रिक महत्व

punjabkesari.in Wednesday, Apr 29, 2026 - 03:32 PM (IST)

Chinnamasta Jayanti 2026 Puja Vidhi and Significance: हिंदू धर्म और तंत्र साधना में दशमहाविद्याओं का विशेष स्थान है, जिनमें से छठी महाविद्या मां छिन्नमस्ता का प्राकट्य उत्सव वैशाख माह की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष 30 अप्रैल 2026 को ये पर्व मनाया जाएगा। मां छिन्नमस्ता को प्रचंड चंडिका के रूप में भी जाना जाता है। मान्यता है कि मां छिन्नमस्तिका जयंती के विशेष दिन मां की आराधना करने से भक्तों के जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

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तांत्रिकों और गृहस्थों के लिए महत्व
मां छिन्नमस्ता की पूजा मुख्य रूप से तांत्रिकों द्वारा सिद्धियां प्राप्त करने के लिए की जाती है। हालांकि, गृहस्थ जीवन व्यतीत करने वाले लोगों के लिए भी यह दिन अत्यंत फलदायी है, लेकिन उन्हें सलाह दी जाती है कि वे मां की पूजा बहुत ही सावधानी पूर्वक और सामान्य विधि से करें। आज के दिन की गई साधना से न केवल तंत्र-मंत्र की बाधाएं शांत होती हैं, बल्कि सुख-शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति भी होती है।

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Chhinnamasta Jayanti Puja Vidhi छिन्नमस्ता जयंती पूजा विधि
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
मां छिन्नमस्ता का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
फिर एक वेदी पर मां छिन्नमस्तिका की प्रतिमा स्थापित करें।
देवी को गंगाजल, पंचामृत व साफ जल से स्नान करवाएं।
अब मां छिन्नमस्ता को कुमकुम व सिंदूर का तिलक लगाएं और गुड़हल के फूलों की माला अर्पित करें।  
इसके बाद फल-फूल, धूप-दीप, कुमकुम, अक्षत और मिठाई चढ़ाएं।
देवी के वैदिक मंत्रों का जाप और ध्यान करें।
अंत में मां छिन्नमस्ता की पूजा करके सुख-शांति की कामना करें। 

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Content Writer

Niyati Bhandari

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