Nirjala Ekadashi 2026: 25 जून को बनेगा महादुर्लभ संयोग, 4 शुभ योगों के मिलन से बरसेगी विष्णु कृपा

punjabkesari.in Thursday, Jun 18, 2026 - 02:55 PM (IST)

Nirjala Ekadashi 2026 Date Muhurat and Shubh Yoga: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है लेकिन इन सभी में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और पुण्यदायी माना गया है। साल 2026 में यह व्रत भक्तों के लिए बेहद खास होने वाला है। इस बार 25 जून को निर्जला एकादशी पर एक साथ 4 अत्यंत शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जो इस दिन के धार्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देगा।

PunjabKesari Nirjala Ekadashi 2026

महादुर्लभ संयोग: एक साथ 4 शुभ योग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल निर्जला एकादशी पर शिव योग, रवि योग और सिद्ध योग की त्रिवेणी बनने जा रही है। इसके साथ ही सबसे बड़ा संयोग यह है कि यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ रहा है। गुरुवार का दिन और एकादशी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय हैं। इस दिन की गई पूजा-अर्चना का फल अन्य दिनों की अपेक्षा अनंत गुना बढ़ जाता है।

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रवि योग: यह सुबह 5:25 से शाम 4:29 तक रहेगा। ये बाधाओं को दूर कर बिगड़े काम बनाता है।
शिव योग: सुबह 10:22 से शुरू होगा, जो सौभाग्य और सफलता का प्रतीक माना जाता है।
सिद्ध योग: सुबह 10:53 से पूरे दिन प्रभावी रहेगा, जो धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम मुहूर्तों में से एक है।

निर्जला एकादशी शुभ मुहूर्त कब रखा जाएगा व्रत? 
पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून 2026 की शाम 6:12 पर होगा और समापन 25 जून को रात 8:09 बजे होगा। उदया तिथि की मान्यता के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून, गुरुवार को ही रखना शास्त्र सम्मत माना जाएगा।

निर्जला व्रत का महत्व
निर्जला एकादशी व्रत अत्यधिक श्रम-साध्य होने के साथ-साथ, कष्ट एवं संयम साध्य भी है। यह एक शारीरिक परीक्षण का दिन भी है जब आप अपनी शारीरिक क्षमता का परीक्षण कर सकते हैं कि क्या आप भूखे-प्यासे एक दिन संयम से निकाल सकते हैं ? 

आधुनिक युग और आने वाले समय में जल का अभाव रहेगा। जल की बचत करना भी सिखाता है यह पर्व।ऐसा व्रत आपातकाल में भी जीना सिखाता है। ये व्रत हमारे धर्म, संस्कृति और देश में किसी न किसी उद्देश्य से रखे गए हैं ताकि हम जीवन में किसी भी आपात स्थिति से निपट सकें। गर्मी से समाज के सभी वर्गों को राहत मिले इसलिए इन दिनों मीठे व ठंडे जल की छबीलें लगाने की प्रथा उत्तर भारत में सदियों से चली आ रही है। जहां जलाभाव है, वहां इसकी पूर्ति की जाए।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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