Char Dham Yatra : आस्था का सैलाब या लापरवाही ? 2025 की चारधाम यात्रा पर रिपोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
punjabkesari.in Monday, Mar 23, 2026 - 09:38 AM (IST)
Char Dham Yatra : उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा को लेकर SDC फाउंडेशन की हालिया रिपोर्ट ने यात्रा प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 की यात्रा के दौरान भीड़ का वितरण बेहद असंतुलित रहा, जिससे हिमालयी क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर भारी दबाव देखा गया।
शुरुआती दिनों में भारी उमड़ी भीड़
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि साल 2025 में कुल श्रद्धालुओं का 72% हिस्सा यात्रा के शुरुआती 60 दिनों (मई और जून) में ही दर्शन के लिए पहुंच गया।
पहले 30 दिन: लगभग 34% श्रद्धालु आए।
अगले 30 दिन: करीब 38% श्रद्धालुओं का आगमन हुआ।
अंतिम दौर: यात्रा के आखिरी 30 दिनों में केवल 2% लोग ही पहुंचे।
जीरो-फुटफॉल वाले दिनों की चुनौती
जहां एक तरफ शुरुआती महीनों में पैर रखने की जगह नहीं थी, वहीं दूसरी ओर मानसून और खराब मौसम के कारण 86 दिन ऐसे रहे जब एक भी श्रद्धालु धामों तक नहीं पहुंच सका।
यमुनोत्री में सबसे ज्यादा 38 दिन और गंगोत्री में 35 दिन सन्नाटा रहा।
यह असंतुलन दिखाता है कि यात्रा का पूरा भार केवल दो महीनों पर सिमट कर रह गया है।
सुरक्षा और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर सवाल
एसडीसी फाउंडेशन ने अपनी रिपोर्ट 'पाथवेज टू पिलग्रीमेज' में हवाई सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है।
केदारनाथ मार्ग पर महज 6 हफ्तों के भीतर हेलीकॉप्टर से जुड़ी 5 घटनाएं दर्ज की गईं।
इन दुर्घटनाओं में करीब 13 लोगों की जान गई, जो पहाड़ी क्षेत्रों में विमानन सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल उठाती है।
रिपोर्ट का मुख्य सुझाव
फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि सरकार को "रिकॉर्ड तोड़ संख्या" का जश्न मनाने के बजाय 'कैरिंग कैपेसिटी' (वहन क्षमता) पर ध्यान देना चाहिए। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि:
भीड़ को पूरी यात्रा अवधि (6 महीने) में समान रूप से बांटने की योजना बनाई जाए।
पर्यावरण और बुनियादी ढांचे की मजबूती को प्राथमिकता दी जाए।
पंजीकरण प्रक्रिया को और अधिक सटीक और डेटा-आधारित बनाया जाए ताकि पीक सीजन में दबाव कम हो सके।
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