Surya Grahan on Hariyali Amavasya 2026 : हरियाली अमावस्या पर लगने वाला सूर्य ग्रहण क्यों है इतना खास, जानें दुनिया पर इसका क्या पडे़गा असर
punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 03:44 PM (IST)
Surya Grahan on Hariyali Amavasya 2026 : साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त, 2026 यानी हरियाली अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। खगोल विज्ञान और धार्मिक नजरिए से सूर्य ग्रहण को बहुत खास माना जाता है। यह ग्रहण कई देशों में मान्य होगा और कई देशों में दृश्य नहीं होगा। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण हरियाली अमावस्या के दिन लगने जा रहा है। इसलिए इसका प्रभाव देश-दुनिया के साथ मानव जीवन और की राशियों पर देखने को मिलेगा। साथ ही हरियाली अमावस्या के दिन लगने के कारण इस साल का आखिरी ग्रहण बहुत खास रहने वाला है। तो आइए जानते हैं दूसरे सूर्य ग्रहण का दुनिया पर क्या असर देखने को मिलेगा।

कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?
साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगेगा। सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात 09 बजकर 04 मिनट से होगी और इसका समापन 13 अगस्त को सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा।
यह सूर्य ग्रहण क्यों है सबसे खास?
ज्योतिष शास्त्र में किसी भी ग्रहण को एक सामान्य खगोलीय घटना माना जाता है। लेकिन जब यह किसी बड़े त्योहार के साथ पड़ता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। माना जाता है कि ग्रहण के दिन चंद्रमा धरती के सबसे नजदीक होता है। जिसके चलते मानसून के इस मौसम में प्रकृति का संतुलन और मौसम में अचानक बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अमावस्या और ग्रहण दोनों ही तिथियां पितृ कार्य, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वोत्तम मानी गई हैं। इस दौरान किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक मिलता है।
कहां-कहां देखने को मिलेगा सूर्य ग्रहण?
साल का दूसरा सूर्य ग्रहण आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। इन जगहों में दिन के समय ही पूरी तरह से अंधेरा छा जाएगा। वहीं उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूर्य ग्रहण थोड़ा सा नजर आएगा।
दुनिया पर क्या असर डालेगा यह सूर्य ग्रहण ?
मानसून के सीजन में इस ग्रहण के कारण दुनिया के कई हिस्सों में भारी बारिश, अचानक बाढ़ या चक्रवाती तूफानों की स्थिति बन सकती है। पृथ्वी के तापमान में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। वैश्विक मंच पर बड़े देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ सकता है। शेयर बाजार और कीमती धातुओं के दामों में अचानक बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सूर्य को आत्मा और आत्मविश्वास का कारक माना जाता है। राहु-केतु के प्रभाव के कारण इस अवधि में लोगों के भीतर अज्ञात भय, मानसिक तनाव और अनिद्रा की समस्या बढ़ सकती है।
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