Braj Holi 2026 Dates : लड्डू से लट्ठमार होली तक रंगों का महासंगम, देखें पूरा होली कैलेंडर
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 01:45 PM (IST)
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Braj Holi 2026 Dates : ब्रज की होली केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति और आनंद का एक ऐसा महापर्व है जो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। ब्रज के रसिया और कान्हा-राधा के प्रेम के रंगों में डूबा यह उत्सव करीब 40 दिनों तक चलता है लेकिन इसके मुख्य आयोजनों का सिलसिला फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी से शुरू होता है। वर्ष 2026 में ब्रज की होली का आरंभ 25 फरवरी से हो रहा है। यदि आप भी इस अलौकिक अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यहां लड्डू होली से लेकर दाऊजी के हुरंगा तक का पूरा कैलेंडर दिया गया है।
Braj Holi Calendar ब्रज होली कैलेंडर 2026
| 25 फरवरी 2026 (बुधवार) | लड्डू होली बरसाना |
| 26 फरवरी 2026 (गुरुवार) | बरसाना लट्ठमार होली बरसाना |
| 27 फरवरी 2026 (शुक्रवार) | नंदगांव लट्ठमार होली नंदगांव |
| 28 फरवरी 2026 (शनिवार) | फूलों की होली वृंदावन |
| 28 फरवरी 2026 (शनिवार) | विधवाओं की होली वृंदावन |
| 1 मार्च 2026 (रविवार) | छड़ी-मार होली गोकुल |
| 2 मार्च 2026 (सोमवार) | रमण रेती होली गोकुल |
| 3 मार्च 2026 (मंगलवार) | होलिका दहन मथुरा और वृंदावन |
| 4 मार्च 2026 (बुधवार) | रंगवाली होली / धुलंडी मथुरा और वृंदावन |
| 5 मार्च 2026 (गुरुवार) हुरंगा होली | (दाऊजी का हुरंगा) दाऊजी मंदिर |
| 6 मार्च 2026 (शुक्रवार) | बलदेव हुरंगा बलदेव |
लड्डू होली (25 फरवरी, बरसाना)
ब्रज होली का औपचारिक आगाज बरसाना के श्रीजी मंदिर में लड्डू होली से होता है। परंपरा के अनुसार, जब नंदगांव से होली का आमंत्रण स्वीकार होने का संदेश आता है, तो खुशी में मंदिर के सेवायत भक्तों पर लड्डू न्योछावर करते हैं। यहां रंग-गुलाल से पहले मिठास बरसती है।
बरसाना लठामार होली (26 फरवरी)
यह दुनिया की सबसे अनूठी होली है। मान्यता है कि द्वापर युग में कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी के गांव बरसाना होली खेलने जाते थे, जहां गोपियां उन्हें प्रेमपूर्वक लाठियों से भगाती थीं। आज भी नंदगांव के हुरियारे ढाल लेकर बरसाना आते हैं और यहां की हुरियारिनें उन पर लाठियां बरसाती हैं। यह दृश्य अत्यंत ऊर्जावान और भावुक होता है।
नंदगांव की लठामार होली (27 फरवरी)
बरसाना की होली के अगले दिन, बरसाना के हुरियारे नंदगांव जाते हैं। यहां भी वही परंपरा दोहराई जाती है। नंदभवन के प्रांगण में होने वाली इस होली में समाज गायन और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलता है।
फूलों वाली होली (28 फरवरी, वृंदावन)
रंगभरी एकादशी के दिन वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में फूलों वाली होली खेली जाती है। यहां रंगों की जगह ताजे फूलों की पंखुड़ियों की वर्षा की जाती है। यह आयोजन बहुत संक्षिप्त (लगभग 15-20 मिनट) होता है इसलिए श्रद्धालुओं को समय का विशेष ध्यान रखना पड़ता है।
गोकुल की छड़ीमार होली (01 मार्च)
चूंकि कान्हा गोकुल में छोटे थे इसलिए वहां लाठियों की जगह छोटी छड़ियों का उपयोग किया जाता है ताकि बाल गोपाल को चोट न लगे। गोकुल की गलियों में छड़ीमार होली के साथ कान्हा की बाल लीलाओं का स्मरण किया जाता है।
होलिका दहन और मुख्य होली (03-04 मार्च)
3 मार्च को ब्रज के हर चौराहे पर होलिका दहन होगा, जिसमें बुराई के अंत का संकल्प लिया जाता है। अगले दिन 4 मार्च को धुलेंडी पर पूरा ब्रज टेसू के रंगों और अबीर-गुलाल में सराबोर हो जाता है। मथुरा के द्वारकाधीश मंदिर में इस दिन की भव्यता देखते ही बनती है।
दाऊजी का हुरंगा (05 मार्च, बलदेव)
होली के अगले दिन मथुरा के पास बलदेव में दाऊजी का हुरंगा आयोजित होता है। इसमें महिलाएं पुरुषों के कपड़े फाड़कर उन्हें कोड़े की तरह इस्तेमाल करती हैं और रंगों की बड़ी-बड़ी कड़ाहियों से होली खेली जाती है। यह उत्सव ब्रज होली के समापन का सबसे आक्रामक और आनंदमयी रूप माना जाता है।
