Bhrigu Samhita Shri Yantra: नवरात्रि में घर लाएं अपार धन-वैभव, महर्षि भृगु जी के इस गुप्त उपाय से दूर होगी दरिद्रता
punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 11:01 AM (IST)
Navratri Lakshmi Prapti Shri Yantra By Maharishi Bhrigu Ji 2026: हिंदू धर्म और वैदिक ज्योतिष में धन, वैभव और सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की आराधना को सर्वोपरि माना गया है। विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि के पावन दिनों में किए गए उपाय कई गुना अधिक फलदायी माने जाते हैं। इसी क्रम में ज्योतिष विज्ञान कि रचना करने वाले महर्षि भृगु जी द्वारा अपने पवित्र ग्रन्थ भृगु संहिता जो कि पंजाब के सुल्तानपुर लोधी में एक ब्राह्मण परिवार के पास संरक्षित है, इस भृगु संहिता में श्री भृगु जी ने बताया यह विशेष श्री यंत्र निर्माण का उपाय अत्यंत प्रभावशाली है, जो न केवल धन की प्राप्ति कराता है बल्कि लक्ष्मी को स्थिर भी करता है।
13 अक्टूबर 2026, दिन मंगलवार के शुभ मुहूर्त में इस यंत्र का निर्माण करके विधि-विधान से स्थापित करने पर घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य, ऐश्वर्य, आनंद, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि यह उपाय श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में आर्थिक स्थिरता आती है और दरिद्रता दूर होती है।

यंत्र बनाने का शुभ मुहूर्त: यंत्र बनाने की तिथि 13 अक्टूबर 2026 दिन मंगलवार है, समय प्रातः 8 से 11 बजे या संध्याकाल के समय इस यंत्र का निर्माण किया जा सकता है। यंत्र में प्रयोग की जाने वाली सामग्री इस प्रकार है- सवा मीटर लाल कपड़ा, 10 गुलाब के शुद्ध व खिले हुए फूल, थोड़ी सी लाल चंदन की लकड़ी, रोली, मौली, 9 कमलगट्टे ( जिसमें सुराख नहीं होने चाहिए एवं खण्डित भी न हों ) यथाशक्ति दक्षिणा जोकि सिक्के के रुप में होनी चाहिए जैसे 1, 2, 5 या 10 का सिक्का।
विधि- सबसे पहले लाल कपड़े को बिछा लें, फिर उस पर गंगा जल का छिंटा देकर एक गुलाब के फूल की पत्तियों को आसन के रूप में इस्तेमाल करें। 1 गुलाब का फूल हाथ में लेकर इन मंत्रों का 1 - 1 बार जाप करें।
देवी मंत्र - ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते॥
गायत्री मंत्र- ॐ र्भू भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
उपरोक्त दोनों मंत्रो का एक-एक बार जाप करके गुलाब के फूल को उस कपड़े पर रख दें। इसी प्रकार 9 फूलों पर एक बार गायत्री मंत्र और एक बार देवी मंत्र का जाप करके कपड़े पर रखते जाएं। मंत्र जाप पश्चात थोड़ी सी लाल चंदन की लकड़ी रखकर, उस पर मौली को वस्त्र के रूप में रख दें। रोली की पूड़ियां खोलकर रख दें। फिर 9 कमलगट्टे दक्षिणा सहित रखें। लक्ष्मी माता की विराजित अवस्था का ध्यान करके प्रार्थना करें, हे मां लक्ष्मी आज मैं आपको इन मंत्रों के द्वारा जागृत करने आया हूं। कृपा करके पूर्ण रूप से जागृत होकर मेरे घर में स्थिर रूप में वास करें। धन-धान्य, ऐश्वर्या, आनंद, वैभव, यश, मान, कीर्ति व सभी प्रकार के सुख प्रदान करें व सुखों को भोगने की कृपा भी प्रदान करने का आशीर्वाद दें।
फिर उस कपड़े को लपेट कर व ऊपर से मौली व धागे से बांधकर अब तैयार हो चुके श्री यंत्र को या तो घर के मंदिर में अथवा धन रखने के स्थान पर रखें।
ध्यान रखें- एक बार श्रीयंत्र स्थापित करने के उपरांत उसे उसके स्थान से कभी भी हिलाया न जाए। तभी स्थिर लक्ष्मी का सुख प्राप्त कर सकेंगे। अगर यंत्र अपने स्थान से हिल जाये तो उसका प्रभाव समाप्त हो जाता है।
इस यंत्र की वैद्यता शरद नवरात्री से चैत्र नवरात्रि के मंगलवार तक ही है। उस दिन दोबारा से इस श्री यंत्र का निर्माण करें। नया श्री यंत्र स्थापित करके फिर पुराना वाला श्री यंत्र उठाकर किसी भी देवी माता के मंदिर में मौली अथवा धागा हटाकर कपड़े को खोलकर मां के सामने रख दें व प्रार्थना करें, हे माता ! जिस तरह से आपने पहले सुख-समृद्धि प्रदान की वैसी कृपा आगे भी बनाए रखें व इस श्री यंत्र को स्वीकार करें।
यंत्र निर्माण के दौरान सावधानियां- यंत्र निर्माण की सामग्री की कोई भी वस्तु खंडित नहीं होनी चाहिए जैसे कि गुलाब के फूल, कमलगट्टे, लाल चंदन की लकड़ी, लाल कपड़ा इत्यादि। क्योंकि खंडित सामग्री से किया गया कोई भी कार्य पूर्ण फलदायी नहीं रहता।

Sanjay Dara Singh
AstroGem Scientist
9416665552
LLB., Graduate Gemologist GIA (Gemological Institute of America), Astrology, Numerology and Vastu (SSM).
