Basant Panchami 2026 : बसंत पंचमी से क्यों होती है होली की शुभ शुरुआत ? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता
punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 02:47 PM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Basant Panchami 2026 : हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व भारतीय परंपरा और संस्कृति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि 23 जनवरी, शुक्रवार को पड़ रही है। बसंत पंचमी मुख्य रूप से हिंदू धर्म से जुड़ा पर्व है, जिसमें विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है। हालांकि, यह दिन केवल ज्ञान की आराधना तक सीमित नहीं है, बल्कि इसी के साथ होली से जुड़े उत्सवों की भी शुरुआत मानी जाती है, जबकि होली का मुख्य पर्व फाल्गुन मास में आता है। आइए जानते हैं बसंत पंचमी और होली के बीच के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध के बारे में।
बसंत ऋतु का स्वागत
बसंत पंचमी के साथ ही बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है। यह समय सर्दियों के विदा होने और मौसम के सुहावने होने का संकेत देता है। बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा कहा गया है, क्योंकि इस दौरान प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में दिखाई देती है। चारों ओर खिले फूल, पीले सरसों के खेत और हरियाली वातावरण को आनंद से भर देती है। यही वजह है कि बसंत ऋतु को नई शुरुआत, उमंग, ऊर्जा और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। बसंत पंचमी को प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी पर्व माना जाता है।
मां सरस्वती की आराधना
बसंत पंचमी का दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की उपासना के लिए समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। देशभर में स्कूलों, कॉलेजों और घरों में विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है और विद्यार्थियों के ज्ञान, एकाग्रता और सफलता की कामना की जाती है। कई स्थानों पर बच्चों को पहली बार अक्षर लिखवाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे विद्यारंभ संस्कार कहा जाता है।
बसंत पंचमी से होली उत्सव की शुरुआत
बसंत पंचमी और होली दोनों ही पर्व बसंत ऋतु से जुड़े हुए हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बसंत ऋतु का आगमन होली के रंगीन उत्सव का संकेत देता है। इस वर्ष होली का पर्व 4 मार्च 2026, बुधवार को मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के दिन से ही फाग गीतों की शुरुआत हो जाती है। विशेष रूप से ब्रज क्षेत्र में इस दिन से होली का उत्सव आरंभ हो जाता है, जो लगभग 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान मंदिरों में प्रतिदिन भगवान को गुलाल अर्पित किया जाता है। प्रकृति भी इस समय अपने विविध रंगों में ढलने लगती है, जिससे होली की तैयारियां और अधिक जीवंत हो जाती हैं। इसी कारण इसे प्रकृति के उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।
शांति से उल्लास तक का सफर
जहां बसंत पंचमी ज्ञान, शांति और साधना का प्रतीक है, वहीं फाल्गुन मास के करीब आते-आते यही वातावरण उत्साह, आनंद और उमंग में बदल जाता है। पौराणिक कथाओं में भी बसंत पंचमी और होली के बीच गहरा संबंध बताया गया है। मान्यता है कि सृष्टि में प्रेम और रंग भरने के लिए कामदेव और रति ने भगवान शिव की तपस्या भंग की थी। तभी से बसंत पंचमी से लेकर होली तक का समय प्रेम, उल्लास और जीवन के रं
