Chaitra Navratri 2026 : क्या नवरात्रि में शादी या गृह प्रवेश करना होता है शुभ ? धर्म ग्रंथों से जानें सच्चाई
punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 01:55 PM (IST)
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Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 से हो रही है। यह नौ दिन शक्ति की उपासना, संकल्प और शुद्धता के माने जाते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि जब ये दिन इतने पवित्र हैं, तो इनमें शादी या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य क्यों नहीं किए जाते?
क्या नवरात्रि में विवाह और गृह प्रवेश शुभ है ?
नवरात्रि अत्यंत शुभ है, लेकिन ज्योतिषीय रूप से विवाह के लिए यह समय वर्जित होता है। वहीं, गृह प्रवेश के मामले में नियम थोड़े अलग हैं।

विवाह और नवरात्रि: क्यों नहीं बजती शहनाई ?
धर्म ग्रंथों और मुहूर्त चिंतामणि जैसे ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, किसी भी कार्य की सफलता उसके मुहूर्त पर निर्भर करती है। नवरात्रि में विवाह न होने के पीछे प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
मलमास या खरमास का प्रभाव: चैत्र नवरात्रि अक्सर मार्च या अप्रैल में पड़ती है। इस दौरान सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे 'मीन संक्रांति' या खरमास कहा जाता है। शास्त्रों में खरमास के दौरान विवाह करना वर्जित माना गया है क्योंकि इस समय सूर्य का तेज कम हो जाता है और शुभ कार्यों के लिए गुरु का बल नहीं मिल पाता।
संयम और ब्रह्मचर्य का समय: नवरात्रि का अर्थ है शक्ति की साधना। इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखते हैं और ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। विवाह एक भोग-विलास और वंश वृद्धि से जुड़ा संस्कार है, जो साधना के इन दिनों की ऊर्जा के विपरीत माना जाता है।
शुक्र तारा का अस्त होना: कई बार चैत्र नवरात्रि के दौरान शुक्र तारा अस्त होता है। बिना शुक्र के उदय हुए विवाह संपन्न नहीं किए जा सकते।

गृह प्रवेश:
नया घर : अगर आप बिल्कुल नए घर में जा रहे हैं, तो इसके लिए सूर्य, गुरु और शुक्र की स्थिति देखी जाती है। यदि खरमास लगा है, तो नए घर में प्रवेश से बचा जाता है।
जीर्णोद्धार या पुराना घर : अगर घर की मरम्मत कराई है या आप किराए के घर में जा रहे हैं, तो नवरात्रि के नौ दिन बहुत शुभ माने जाते हैं क्योंकि माता दुर्गा स्वयं शक्ति और निवास की अधिष्ठात्री हैं।
अपवाद: कई विद्वान मानते हैं कि नवरात्रि के नौ दिन स्वयंसिद्ध मुहूर्त होते हैं लेकिन गृह प्रवेश जैसे बड़े निवेश और स्थायित्व वाले कार्यों के लिए फिर भी स्थानीय पंचांग और नक्षत्र शुद्धि देख लेनी चाहिए।

