Ayodhya Ram Mandir news : रामलला के साथ अब पंचायतन दर्शन का सौभाग्य, परकोटे के मंदिरों में प्राण-प्रतिष्ठा की तैयारी अंतिम चरण में
punjabkesari.in Monday, Apr 06, 2026 - 09:40 AM (IST)
Ayodhya Ram Mandir news : राम नगरी अयोध्या में प्रभु श्री राम के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं का अनुभव अब और भी दिव्य और संपूर्ण होने जा रहा है। राम मंदिर के मुख्य गर्भगृह में विराजित रामलला के दर्शन के बाद, अब भक्त मंदिर के चारों ओर बने विशाल परकोटे में स्थित विभिन्न मंदिरों के दर्शन भी कर सकेंगे। ट्रस्ट के अनुसार, इन मंदिरों के निर्माण और साज-सज्जा का कार्य अब अपने आखिरी पड़ाव पर है।
परकोटे में किन देवताओं के होंगे दर्शन?
वास्तु शास्त्र और सनातन परंपरा के अनुसार, मुख्य मंदिर के चारों ओर बने इस परकोटे के कोनों और किनारों पर 6 विशेष मंदिरों का निर्माण किया गया है।
भगवान सूर्य (Sun God): परकोटे के एक कोने पर सूर्य देव का मंदिर है।
माँ भगवती (Goddess Bhagwati): शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा का स्थान।
भगवान गणेश (Lord Ganesha): प्रथम पूज्य गणपति बप्पा।
भगवान शिव (Lord Shiva): महादेव का विशेष मंदिर।
हनुमान जी (Lord Hanuman): रामभक्त हनुमान का मंदिर (उत्तरी भाग)।
मां अन्नपूर्णा (Maa Annapurna): जगत का पोषण करने वाली माता (दक्षिणी भाग)।
परकोटे की विशेषता: एक अभेद्य और भव्य निर्माण
राम मंदिर का यह परकोटा केवल एक दीवार नहीं, बल्कि वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है।
लंबाई और चौड़ाई: यह परकोटा लगभग 732 मीटर लंबा और 14 फीट चौड़ा है।
परिक्रमा पथ: श्रद्धालु इस परकोटे के भीतर से ही मंदिर की परिक्रमा कर सकेंगे, जिससे उन्हें धूप और बारिश से बचाव मिलेगा।
नक्काशी: दीवारों पर त्रेतायुग की झलक और रामायण के प्रसंगों को पत्थरों पर उकेरा गया है।
ट्रस्ट की अंतिम तैयारियां
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, परकोटे के इन मंदिरों में मूर्तियों की स्थापना और प्राण-प्रतिष्ठा के लिए विशेष मुहूर्त और अनुष्ठानों की योजना बनाई जा रही है। पत्थरों की फिनिशिंग और लाइटिंग का काम दिन-रात चल रहा है ताकि श्रद्धालुओं को रात के समय भी अद्भुत दृश्य देखने को मिले।
भक्तों को क्या होगा लाभ?
अब तक श्रद्धालु मुख्य रूप से केवल रामलला के दर्शन कर पा रहे थे। लेकिन परकोटे के मंदिरों के खुलने से:
भक्तों को एक ही परिसर में 'पंचायतन शैली' के दर्शन का लाभ मिलेगा।
मंदिर में रुकने का समय और आध्यात्मिक अनुभव की गहराई बढ़ेगी।
भीड़ प्रबंधन में भी आसानी होगी क्योंकि भक्त परकोटे के अलग-अलग हिस्सों में विभाजित रहेंगे।
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