Aniruddha Chaturthi 2026: अनिरुद्ध स्वरूप में विराजेंगे विघ्नहर्ता, रवि योग के दुर्लभ संयोग में बरसेगी विशेष कृपा
punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 02:01 PM (IST)
Aniruddha Chaturthi 2026: हर माह में आने वाली चतुर्थी तिथि का खास महत्व रहता है और जब बात आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी की हो रही हो तो इसका पुण्य और भी अधिक बढ़ जाता है। इस बार 17 जुलाई 2026, शुक्रवार को 'अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी' मनाई जाएगी। शास्त्रों की मान्यता है की गणेश जी के 'अनिरुद्ध' स्वरूप का पूजन करने से जीवन पथ पर आ रही सभी बाधाएं शांत होती हैं। इस वर्ष आने वाली अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि इस रोज रवि योग का शुभ संयोग भी बन रहा है। इस दौरान की गई पूजा अन्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदाई सिद्ध होती है।

अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी शुभ मुहूर्त और समय: पंचांग गणना के अनुसार, चतुर्थी तिथि का शुभारंभ 17 जुलाई 2026 की भोर में 06:27 बजे से होगा और समापन अगली सुबह 18 जुलाई को 04:42 बजे होगा। गणेश जी का जन्म दोपहर के वक्त हुआ था, इसलिए उनकी पूजा भी मध्याह्न काल में करना उत्तम माना गया है। पूजा के लिए सबसे सटीक समय दोपहर 11:05 बजे से दोपहर 01:50 बजे तक रहने वाला है, जिसकी कुल अवधि 2 घंटे 45 मिनट है।
अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पर रहें सावधान: विनायक चतुर्थी पर चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है क्योंकि इससे मिथ्या कलंक लगने का भय रहता है। 17 जुलाई को सुबह 08:37 बजे से रात 09:33 बजे तक आकाश की ओर न देखें। इसके अलावा, व्रत के दौरान तामसिक भोजन का त्याग करें और केवल फलाहार ही ग्रहण करें।
अनिरुद्ध विनायक चतुर्थी पूजा विधि: दोपहर को स्नान आदि से निवृत होकर घर के पूजा स्थल में पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके आसन लगाकर बैठ जाएं। श्री गणेश यंत्र की स्थापना करें तत्पश्चात पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली, लाल चंदन और मोदक गणेश जी को अर्पित करें। गणेश जी को सूखे सिंदूर का तिलक लगाने के बाद अपने मस्तक पर भी लगाएं। विधिवत व श्रद्धापूर्वक आरती करें।
एकांत में बैठकर इन गणेश मंत्रों का जाप करें।
मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप करें।
गणेश मंत्र- त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय। नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धि नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यम्।
अर्थात- इस मंत्र का अर्थ है भगवान गणेश सभी बुद्धियों को देने वाले, बुद्धि को जगाने वाले और देवताओं के भी ईश्वर हैं। आप ही सत्य और नित्य बोधस्वरूप हैं। आपको मैं सदा नमन करता हूं। कम से कम 21 बार इस मंत्र का जाप करें।
ये भगवान गणेश के 12 नाम हैं। इन नामों का जाप उचित स्थान पर बैठकर किया जाए तो यह उत्तम फलदायी है। जब पूरी पूजा विधि हो जाए तो कम से कम 11 बार इन नामों का जाप करना शुभ होता है।
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:।
नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक:।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:।
गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम्।।

