Gupt Navratri 2026: तंत्र साधना और अघोरियों की रहस्यमयी दुनिया, जानें 9 दुर्लभ भोग और सिद्धियों का वो सच जो आमजन नहीं जानते!

punjabkesari.in Wednesday, Jul 15, 2026 - 08:32 AM (IST)

Gupt Navratri 2026: हिंदू धर्म के कैलेंडर में साल की चार सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से दो ऐसी हैं जिनसे दुनिया लगभग अनजान रहती है। जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में घरों में घट स्थापना और गरबों की धूम रहती है, वहीं आषाढ़ और माघ मास की 'गुप्त नवरात्रि' केवल उन साधकों के लिए होती है जो गुप्त सिद्धियों की तलाश में होते हैं। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का पावन पर्व 15 जुलाई से 23 जुलाई तक मनाया जाएगा। यह समय सामान्य पूजा-पाठ का नहीं, बल्कि 'वामाचार पद्धति' और कठिन तंत्र साधनाओं के जरिए स्वयं को शक्ति से जोड़ने का है। शास्त्रों के अनुसार, इन 9 दिनों में किए गए विशेष भोग और दान न केवल रोगों से मुक्ति दिलाते हैं, बल्कि साधक की सोई हुई किस्मत को भी जगा देते हैं।

PunjabKesari Gupt Navratri

शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा से लेकर नौ तिथियों में देवी को विशिष्ट भोग अर्पित करने तथा ये भोग गरीबों को दान करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं। ये उपाय बहुत ही आसान हैं। यदि ये उपाय पूरी श्रद्धा व विश्वास से किए जाएं तो किस्मत भी साथ देने लगती है।

गुप्त नवरात्रि में हर दिन देवी के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। इन नौ दिनों में विविध प्रकार की पूजा से माता को प्रसन्न किया जाता है।

गुप्त नवरात्रि में देवी को विभिन्न प्रकार के भोग लगाए जाते हैं। प्रतिपदा यानी गुप्त नवरात्रि के पहले दिन माता को घी का भोग लगाएं तथा उसका दान करें। इससे रोगी को कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा वह निरोगी होता है।

गुप्त नवरात्रि की द्वितीया तिथि को माता को शक्कर का भोग लगाएं तथा उसका दान करें। इससे साधक को दीर्घायु प्राप्त होती है। तृतीया तिथि को माता को दूध चढ़ाएं तथा इसका दान करें। ऐसा करने से सभी प्रकार के दुखों से मुक्ति मिलती है।

PunjabKesari Gupt Navratri

चतुर्थी तिथि को मालपूआ चढ़ाकर दान करें। इससे सभी प्रकार की समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं।

पंचमी को केले तथा षष्ठी तिथि को शहद का भोग लगाएं। केले का भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति रहती है, वहीं शहद चढ़ाने से धन संबंधी समस्याओं का निराकरण होता है। भोग लगाने के बाद इन दोनों वस्तुओं को गरीबों में बांट दें।

गुप्त नवरात्र में षष्ठी, सप्तमी और अष्टमी का त्रिदिवसीय शुभ योग होता है। जब कुमार षष्ठी, विवस्वत सप्तमी और दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा।

कुमार षष्ठी व्रत हेतु भगवान शालिग्रामजी का विग्रह, कार्तिकेय का चित्र, तुलसी का पौधा (गमले में लगा हुआ), तांबे का लोटा, नारियल, पूजा की सामग्री, जैसे- कुमकुम, अक्षत, हल्दी, चंदन अबीर, गुलाल, दीपक, घी, इत्र, पुष्प, दूध, जल, मौसमी फल, मेवा, मौली आसन इत्यादि आवश्यक है। विवस्वत सप्तमी के दिन मध्याह्न में विवस्वत सूर्य पूजा का विधान है।

इस दिन रथ चक्र के जैसा गोल मंडल बनाकर इसका गन्ध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पण कर, पंचोपचार पूजा करें व दान दें। महाष्टमी के दिन हल्दी के जल से स्नान करने के बाद वैसे ही जल से महिषन्धी देवी को स्नान करावें एवं केशर, चन्दन, धूप, कपूर आदि से षोडशोपचार पूजन करें।

PunjabKesari Gupt Navratri

गुप्त नवरात्र में दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि शाक्त (महाकाली की पूजा करने वाले) एवं शैव (भगवान शिव की पूजा करने वाले) धर्मावलंबियों के लिए पैशाचिक, वामाचारी क्रियाओं के लिए अधिक शुभ एवं उपयुक्त होता है। इसमें प्रलय एवं संहार के देवता महाकाल एवं महाकाली की पूजा की जाती है। इस गुप्त नवरात्रि में संहारकर्ता देवी-देवताओं के गणों एवं गणिकाओं अर्थात भूत-प्रेत, पिशाच, बैताल, डाकिनी, शाकिनी, खण्डगी, शूलनी, शववाहनी आदि की साधना की जाती है। ऐसी साधनाएं शाक्त मतानुसार शीघ्र ही सफल होती हैं।

मान्यता है कि दुनिया में सिर्फ चार श्मशान घाट ही ऐसे हैं, जहां तंत्र क्रियाओं का परिणाम बहुत जल्दी मिलता है। ये हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, त्रयंबकेश्वर (नासिक) और उज्जैन स्थित चक्रतीर्थ श्मशान। गुप्त नवरात्रि में यहां दूर-दूर से साधक गुप्त साधनाएं करने आते हैं। 

PunjabKesari Gupt Navratri

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Niyati Bhandari

Related News