Amalaki Ekadashi 2026 : आमलकी एकादशी पर ऐसे करें आंवला पेड़ की पूजा, मिलेगा अक्षय पुण्य
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 10:10 AM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Amalaki Ekadashi 2026 : हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है लेकिन फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली आमलकी एकादशी का स्थान सबसे अलग है। इसे आंवला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन तिथि भक्तों के लिए अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि लेकर आ रही है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान है। शास्त्रों के अनुसार, आंवले के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास होता है।
आमलकी एकादशी पूजन विधि
प्रातः काल का संकल्प
एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त हों। स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
आंवला वृक्ष के पास जाएं
यदि आपके घर में या आसपास आंवले का पेड़ है, तो वहां जाएं। यदि पेड़ उपलब्ध न हो, तो आंवले का फल रखकर भी पूजा की जा सकती है, लेकिन वृक्ष की पूजा सर्वश्रेष्ठ है।
वेदी निर्माण और कलश स्थापना
पेड़ के चारों ओर की जगह को साफ करें। वहां एक छोटा सा चबूतरा या वेदी बनाएं। उस पर एक जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश के ऊपर पंचपल्लव रखें और उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें।
षोडशोपचार पूजन
अर्घ्य और स्नान: वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें।
गंध और तिलक: वृक्ष के तने पर रोली, चंदन और अक्षत (बिना टूटे चावल) से तिलक लगाएं।
पुष्प अर्पण: सुगंधित पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। याद रखें, एकादशी पर तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इसलिए एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
धूप-दीप: शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाएं।
विशेष भोग
भगवान विष्णु को आंवला अत्यंत प्रिय है। इसलिए उन्हें ऋतुफल के साथ-साथ आंवले का भोग अवश्य लगाएं।
परिक्रमा और रक्षा सूत्र
आंवले के वृक्ष की सात या ग्यारह बार परिक्रमा करें। परिक्रमा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। परिक्रमा के दौरान पेड़ के तने पर सूती सफेद धागा या मौली लपेटें।
